शेयर मार्केट में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर ठगी करने वाले दो गिरोह के चार सदस्यों को साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने शनिवार को अलग-अलग स्थानों से दबोच लिया. आरोपी और उनके द्वारा खुलवाए गए खातों में ठगी की रकम आई थी. गिरफ्त में आए आरोपियों का आपराधिक इतिहास पता किया जा रहा है.
- राजस्थान के तीन और हरिद्वार का एक आरोपी चढ़ा पुलिस के हत्थे: एडीसीपी साइबर मनीषा सिंह ने बताया कि बीते सात अप्रैल को सेक्टर-77 निवासी व्यक्ति ने पुलिस को शिकायत दी थी कि उसके साथ एक करोड़ रुपये की ठगी हो गई है. ठगी शेयर मार्केट में निवेश कर मुनाफा कमाने के नाम पर हुई. मामला संज्ञान में आते ही पुलिस ने अज्ञात ठगों के खिलाफ केस दर्ज किया और जांच शुरु कर दी.
- ठगी में शामिल ठगों की गिरफ्तारी के लिए साइबर क्राइम थाना प्रभारी की नेतृत्व में एक टीम गठित की गई. जिन खातों में ठगी की रकम गई थी, तत्काल पुलिस ने उन खातों को फ्रीज कराया. विवेचना के दौरान सामने आया कि हरिद्वार के रानीपुर निवासी 52 वर्षीय राजेंद्र शर्मा के खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर हुई है. किसी काम से जब वह नोएडा आया तो मुखबिर से मिली सूचना पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.
- पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि उसने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर निजी बैंक में खाता खुलवाया. ठगी के साढ़े पांच लाख रुपये इन्हीं खातों में आए थे. आरोपी ने स्वयं बैंक से अन्य साथियों के खाते में रकम भेज दिया था. राजेंद्र के अन्य साथियों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है. आरोपी द्वारा खोले गए खातों को जब एनसीआरपी पोर्टल पर चेक किया गया तो उसपर कुल 13 शिकायतें दर्ज मिली. हरियाणा में पांच, दिल्ली में दो, यूपी में एक, महाराष्ट्र में तीन, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में एक-एक शिकायत दर्ज है. आरोपी लंबे समय से ठगों को खाते मुहैया कराने का काम कर रहा है.
- राजस्थान का गिरोह दबोचा: निवेश के नाम पर हो रही ठगी की जब पुलिस जांच कर रही थी तो सामने आया था कि राजस्थान के अलग-अलग हिस्से में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो ठगी के पैसे मंगवाने के लिए खाते खुलवाता है. बाकायदा इसके लिए कंपनियां बनाई जाती हैं. इन्हीं कंपनी के खातों में पैसा जाता है. सोमवार को पुलिस ने राजस्थान के गिरोह का पर्दाफाश कर तीन ठगों को गिरफ्तार कर लिया. आरोपियों की पहचान राजस्थान के बीकानेर निवासी महेंद्र, फलौदी निवासी दिनेश और जोधपुर निवासी विकास विश्नोई के रूप में हुई है.
- एसीपी साइबर विवेक रंजन राय ने बताया कि एक अप्रैल को एक व्यक्ति ने थाने में 33 लाख 92 हजार रुपये की ठगी होने की शिकायत दी थी. उसके साथ भी शेयर मार्केट में निवेश कर मुनाफा कमाने के नाम पर ही ठगी हुई थी. पुलिस ने संदिग्ध लाभार्थी बैंक खातों को तत्काल फ्रीज करवाया था. जांच के दौरान जिन तीन आरोपियों का नाम सामने आया, उन्हें उनके निवास स्थान से ही दबोच लिया गया. इस मामले में पुलिस ने ठगी के 18 लाख रुपये वापस भी कराए थे.
- विवेचना के दौरान पुलिस टीम को पता चला था कि ठगी की रकम में से चार लाख 20 हजार रुपये एक संदिग्ध कंपनी के बैंक खाते में ट्रांसफर हुए हैं. पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपी दिनेश द्वारा साइबर धोखाधड़ी से संबंधित धनराशि को प्राप्त करने के लिए एक कंपनी खोली गई, जिसमें दिनेश स्वयं प्रोपराइटर था. आरोपी महेंद्र मैन्डेट (सिग्नेचर अथॉरटी) था. आरोपी विकास इन दोनों का सहयोगी है और धोखाधडी से संबंधित धनराशि को सेटल करता था. दिनेश की कंपनी के खाते में ही ठगी की रकम गई थी. जिन खातों में रकम गई उनपर 11 शिकायतें विभिन्न राज्यों में दर्ज हैं.
- लगातार सामने आ रहे ठगी के मामले: बीते छह महीने में डिजिटल अरेस्ट और निवेश संबंधी ठगी के मामलों में कमी आई थी. हालांकि बीते 15 दिनों में निवेश संबंधी ठगी के मामले अचानक से बढ़े हैं. इस अवधि में निवेश संबंधी ठगी के नौ मामले साइबर क्राइम थाने में सामने आ चुके हैं. सभी मामलों में ठगों ने निवेश के नाम पर कारोबारी, अधिकारी और इंजीनियर के साथ करोड़ों रुपये की ठगी की है। तीनों मामले में ठगी का तरीका लगभग एक जैसा ही रहा.
प्रलोभन में न आने की अपील: डीसीपी साइबर प्रीति यादव ने बताया कि कोई भी कंपनी या शेयर बाजार ऐसा नहीं है, जहां निवेश करके कुछ ही दिन में रकम दो से तीन गुनी हो जाती हो. अगर कोई ऐसा प्रलोभन या झांसा देता है तो तुरंत सतर्क हो जाएं. किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर निवेश न करें. अगर कोई अनजान व्यक्ति किसी अनजान ग्रुप में जोड़ता है तो उससे इसका कारण पूछें, जिस कंपनी में निवेश कर रहे हैं, उसका बैकग्राउंड अवश्य जांच लें.


