मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को लगातार तीसरे कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों का रुख सतर्क रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 460 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी भी 22,700 के स्तर से नीचे बंद हुआ।
सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट?
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 460.30 अंक गिरकर 73,249.39 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 123.70 अंक टूटकर 22,687.65 पर आ गया।
बाजार में बिकवाली का दबाव व्यापक रहा। प्रमुख 16 सेक्टरों में से 15 में गिरावट दर्ज की गई। मीडिया, एफएमसीजी और आईटी सेक्टर के शेयरों पर खास दबाव देखने को मिला।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
शेयर बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें शामिल रहीं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड का भाव 111.82 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से आयात बिल बढ़ने और महंगाई पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। इससे परिवहन, उत्पादन और अन्य क्षेत्रों की लागत भी बढ़ सकती है।
मध्य पूर्व के तनाव से निवेशकों में सतर्कता
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ाई है। ऐसे हालात में निवेशक जोखिम वाले निवेश को लेकर अधिक सतर्क हो सकते हैं। इसका असर भारतीय शेयर बाजार के कारोबार पर भी दिखाई दिया।
इसके अलावा, महंगे कच्चे तेल से कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ने और मुनाफे के मार्जिन पर दबाव पड़ने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।
इन शेयरों में रही तेजी, इन पर पड़ा दबाव
बाजार में व्यापक गिरावट के बावजूद कुछ प्रमुख शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। उपलब्ध कारोबारी जानकारी के अनुसार, बजाज फाइनेंस, सिप्ला, आईसीआईसीआई बैंक, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) प्रमुख बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों में शामिल रहे।
दूसरी ओर, नेस्ले इंडिया, टेक महिंद्रा, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयरों में गिरावट देखी गई।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
बाजार में लगातार तीसरे दिन आई गिरावट के बीच निवेशकों के लिए कंपनी की वित्तीय स्थिति और कारोबारी प्रदर्शन पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो सकता है। मजबूत बैलेंस शीट, बेहतर नकदी प्रवाह और नियंत्रित कर्ज वाली कंपनियों का मूल्यांकन करते समय इन पहलुओं को देखा जा सकता है।
हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक घटनाक्रम और महंगाई से जुड़े जोखिमों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेश संबंधी कोई भी निर्णय लेते समय अपने वित्तीय लक्ष्यों, जोखिम उठाने की क्षमता और स्वतंत्र वित्तीय सलाह को ध्यान में रखना चाहिए।
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