Friday, October 16, 2026

शारदीय नवरात्रि 2026: महाअष्टमी और महानवमी की तारीख को लेकर असमंजस, जानें कब करें कन्या पूजन.

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धार्मिक डेस्क: शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिनों में महाअष्टमी और महानवमी की पूजा को लेकर श्रद्धालुओं के बीच तारीख और समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खासकर कन्या पूजन, हवन और व्रत पारण करने वाले भक्त यह जानना चाहते हैं कि उन्हें अष्टमी की पूजा करनी चाहिए या नवमी के दिन कन्या पूजन करना अधिक उचित रहेगा।

लखनऊ के वैदिक ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के हवाले से प्रकाशित जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 में महाअष्टमी का व्रत 19 अक्टूबर और महानवमी का पर्व 20 अक्टूबर को मनाने की बात कही गई है। हालांकि, पूजा की सही तिथि और मुहूर्त तय करने के लिए स्थानीय पंचांग और पुरोहित की सलाह को प्राथमिकता देना उचित होगा।

महाअष्टमी 2026: कब करें पूजा और व्रत?

प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, 18 अक्टूबर रविवार को सुबह 8 बजकर 29 मिनट के बाद अष्टमी तिथि शुरू होने का उल्लेख है। लेकिन सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि नहीं होने के कारण इस दिन महाअष्टमी का मुख्य व्रत न रखने की सलाह दी गई है।

इसके अनुसार, 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि रहने के कारण महाअष्टमी का व्रत रखने और मां दुर्गा की विशेष पूजा करने की बात कही गई है। इस दिन भक्त मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की आराधना करते हैं।

महानवमी 2026: हवन और व्रत पारण कब करें?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को महानवमी मनाने का उल्लेख किया गया है। लेख में नवमी तिथि दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहने की बात कही गई है।

महानवमी के अवसर पर श्रद्धालु मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं। कई परिवारों में इस दिन हवन, कन्या पूजन और व्रत पारण की परंपरा होती है।

हालांकि, नवमी तिथि के आरंभ और समाप्ति का सटीक समय स्थान तथा पंचांग के अनुसार जांचना जरूरी है। इसलिए हवन या व्रत पारण करने से पहले स्थानीय धार्मिक कैलेंडर से पुष्टि कर लें।

कन्या पूजन 19 या 20 अक्टूबर को करें?

कन्या पूजन की तारीख परिवार की धार्मिक परंपरा और अष्टमी या नवमी के व्रत के अनुसार तय की जा सकती है।

  • अष्टमी पर कन्या पूजन: जो परिवार महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन करते हैं, वे अपनी स्थानीय पंचांग परंपरा के अनुसार 19 अक्टूबर का समय देख सकते हैं।
  • नवमी पर कन्या पूजन: जो परिवार महानवमी पर कन्या पूजन करते हैं, वे 20 अक्टूबर को नवमी तिथि और स्थानीय मुहूर्त की पुष्टि करके पूजा करें।
  • हवन और व्रत पारण: इन धार्मिक कार्यों के लिए तिथि समाप्त होने के समय की सही जानकारी लेना जरूरी है।

कन्या पूजन में छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। कई परिवारों में कन्याओं के साथ भैरव स्वरूप माने जाने वाले बालक को भोजन कराने की भी परंपरा है।

महाअष्टमी पर मां महागौरी, नवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा

नवरात्रि की अष्टमी तिथि मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी को समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी आराधना से शांति और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

वहीं, महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। भक्त उनसे सुख, समृद्धि, शक्ति और सफलता का आशीर्वाद मांगते हैं। नवरात्रि के अंतिम दिनों में पूजा, हवन और कन्या पूजन के साथ कई श्रद्धालु अपना व्रत भी पूरा करते हैं।

जरूरी सलाह: अलग-अलग क्षेत्रों में पंचांग और पूजा की परंपराओं में अंतर हो सकता है। महाअष्टमी और महानवमी की तारीख के साथ तिथि समाप्ति का समय भी स्थानीय पंचांग से सत्यापित करें। धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने पुरोहित से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

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