मुंबई: वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और अमेरिका में मुद्रास्फीति के नरम आंकड़ों के असर से बुधवार को भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। दिन की शुरुआत मजबूत रही और बैंकिंग तथा वित्तीय कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। हालांकि, कारोबार के अंतिम चरण में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे शुरुआती बढ़त का बड़ा हिस्सा कम हो गया।
सेंसेक्स और निफ्टी में हल्की बढ़त
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 130.49 अंक यानी 0.17 प्रतिशत बढ़कर 77,185.43 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह एक समय 77,646.27 के उच्च स्तर तक पहुंच गया था। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 50 सूचकांक 26.45 अंक या 0.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,078.50 पर बंद हुआ।
मंगलवार को बाजार में आई तेज गिरावट के बाद बुधवार का सत्र निवेशकों के लिए कुछ राहत लेकर आया।
किन शेयरों ने दिखाई मजबूती
आज के कारोबार में इटरनल, अल्ट्राटेक सीमेंट, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई), बजाज फाइनेंस, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) और एशियन पेंट्स के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। खासतौर पर बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों ने बाजार को सहारा दिया।
दूसरी ओर, पावर ग्रिड, लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी), टाटा स्टील और इंफोसिस के शेयर दबाव में रहे और इनमें गिरावट दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े शेयरों की तुलना में स्मॉल-कैप और मिड-कैप कंपनियों के शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।
वैश्विक बाजारों का मिला-जुला असर
एशियाई बाजारों में कारोबार मिश्रित रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक उल्लेखनीय तेजी के साथ बंद हुआ, जबकि जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंगसेंग भी बढ़त में रहे। इसके विपरीत, शंघाई कंपोजिट में कमजोरी दर्ज की गई।
यूरोपीय बाजारों में दोपहर के कारोबार के दौरान दबाव देखा गया, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार पिछले कारोबारी सत्र में सकारात्मक रुख के साथ बंद हुए थे।
कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों पर नजर
वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 0.90 प्रतिशत बढ़कर 85.50 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जिससे महंगाई और आयात लागत को लेकर बाजार की चिंताएं बनी हुई हैं।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में 739.69 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी, जिसका असर निवेशकों की धारणा पर भी देखने को मिला।


