Wednesday, August 19, 2026

वैश्विक दबाव में भारतीय बाजार, सेंसेक्स 326 अंक गिरा; निफ्टी 24,078 पर बंद.

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मुंबई। कमजोर वैश्विक संकेतों और बाजार में जारी बिकवाली के कारण भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भी दबाव बना रहा। दोनों प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 325.78 अंक यानी 0.42% टूटकर 76,909.68 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 में 76.60 अंक यानी 0.32% की गिरावट दर्ज हुई और यह 24,078.30 पर बंद हुआ।

24,000 के स्तर पर बाजार की नजर

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर अहम सपोर्ट जोन बना हुआ है। यदि सूचकांक 24,050 के नीचे कमजोरी दिखाता है तो आने वाले सत्र में 24,000 के स्तर तक दबाव बढ़ सकता है।

वहीं, बाजार में रिकवरी होने पर 24,200 से 24,300 के बीच का क्षेत्र तत्काल प्रतिरोध के रूप में देखा जा रहा है।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में

बुधवार के कारोबार में सिर्फ बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी कमजोरी रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.21% नीचे आया। दूसरी ओर निफ्टी स्मॉलकैप में 0.51% की गिरावट दर्ज की गई।

इससे संकेत मिलता है कि बिकवाली का असर बाजार के विभिन्न हिस्सों में देखने को मिला।

केमिकल सेक्टर सबसे ज्यादा कमजोर

सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी केमिकल इंडेक्स सबसे कमजोर क्षेत्रों में रहा। निफ्टी की प्रमुख कंपनियों में मैक्स हेल्थकेयर, कोल इंडिया और पावर ग्रिड कॉरपोरेशन दबाव में रहे।

सेंसेक्स की चुनिंदा कंपनियों में बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, आईटीसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयरों में भी गिरावट देखी गई।

IT शेयरों ने संभाला मोर्चा

बाजार की कमजोरी के बीच IT सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी IT इंडेक्स में मजबूती रही। सेंसेक्स में HCL Technologies, Eternal, Kotak Mahindra Bank, Sun Pharmaceutical और Titan बढ़त वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे।

वैश्विक हालात से प्रभावित हुआ बाजार

विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय निवेशकों की धारणा पर पड़ रहा है। हालांकि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कई कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं, लेकिन बाजार को समर्थन देने वाले कुछ पुराने सकारात्मक कारकों का प्रभाव अब सीमित होता दिख रहा है।

आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा के साथ-साथ कच्चे तेल की आपूर्ति और उसकी कीमतों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। इन कारकों का भारतीय शेयर बाजार की आगे की चाल पर असर पड़ सकता है।

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