Monday, June 15, 2026

वैश्विक तनाव और कम विकास दर अनुमान से निफ्टी 0.77% और सेंसेक्स 0.71% गिरकर लगातार दूसरे हफ्ते नुकसान में बंद हुए.

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वैश्विक स्तर पर जारी उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के कारण घरेलू शेयर बाजार में इस सप्ताह भी मंदी का माहौल रहा. लगातार दूसरे सप्ताह भारतीय इक्विटी बेंचमार्क—निफ्टी और सेंसेक्स—गिरावट के साथ बंद हुए. हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नीतिगत घोषणाओं ने बाजार को संभालने की कोशिश की, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के आगे यह प्रयास नाकाफी साबित हुए.

बाजार के मुख्य आंकड़े
साप्ताहिक कारोबार के दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी 0.77 प्रतिशत टूटकर 23,366 के स्तर पर बंद हुआ. हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भी इसमें 0.21 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई. वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क सेंसेक्स 116 अंक या 0.16 प्रतिशत की दैनिक गिरावट के साथ 74,243 पर बंद हुआ. पूरे सप्ताह के लिहाज से सेंसेक्स में 0.71 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

गिरावट के मुख्य कारण
वैश्विक और भू-राजनीतिक तनाव: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाए रखी. हालांकि बीच-बीच में तेल की कीमतों में आई मामूली कमी से बाजार को थोड़ी राहत जरूर मिली.

विकास दर के अनुमान में कटौती: रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने जहां एक तरफ नकदी बढ़ाने और रुपये को मजबूती देने वाले कदम उठाए, वहीं दूसरी तरफ देश की आर्थिक विकास दर के अनुमान में की गई कटौती ने निवेशकों के उत्साह को थोड़ा कम कर दिया. इसके चलते कई प्रमुख सेक्टरों में मुनाफावसूली देखी गई.

सकारात्मक पहलू और रुपये में मजबूती
बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ मोर्चों पर सकारात्मक संकेत भी मिले. केंद्र सरकार और आरबीआई ने विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार तक पहुंच आसान बनाने और बॉन्ड मार्केट में टैक्स संबंधी दिक्कतों को कम करने के लिए अहम कदम उठाए हैं. इन फैसलों से आने वाले समय में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है. इसके अलावा, केंद्रीय बैंक के प्रयासों के चलते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया मजबूत होकर 95 रुपये के स्तर से नीचे आ गया, जिससे मुद्रा बाजार को बड़ी राहत मिली.

मिडकैप और स्मॉलकैप का हाल
इस हफ्ते बड़े शेयरों के मुकाबले छोटे और मझोले शेयरों में अलग रुझान देखने को मिला. जहां निफ्टी मिडकैप 100 में 1.57 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई, वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 केवल 0.16 प्रतिशत की मामूली कमजोरी के साथ बंद होने में सफल रहा.

आगे की राह और महत्वपूर्ण स्तर
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार एक सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है. निवेशकों की नजर अब मानसून की प्रगति, देश में महंगाई के आंकड़ों और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर रहेगी.

निफ्टी 50 के स्तर: निफ्टी के लिए 23,450 से 23,550 का क्षेत्र मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है, जबकि गिरावट की स्थिति में 23,250 का स्तर एक बेहद महत्वपूर्ण सपोर्ट का काम करेगा.

बैंक निफ्टी के स्तर: बैंकिंग सूचकांक के लिए ऊपर की ओर 54,800 से 55,000 का स्तर पार करना बड़ी चुनौती होगी, जबकि नीचे की तरफ 54,000 से 53,800 का दायरा मजबूत सपोर्ट जोन बना हुआ है.

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