Friday, April 17, 2026

लेंसकार्ट विवाद में पीयूष बंसल ने बिंदी-तिलक पर प्रतिबंध को पुरानी गलती बताकर माफी मांगी, जबकि सोशल मीडिया पर बॉयकॉट अभियान जारी है.

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नई दिल्ली: मशहूर आईवियर रिटेलर ‘लेंसकार्ट’ इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है. सोशल मीडिया पर कंपनी की एक कथित ‘स्टाइल गाइड’ वायरल होने के बाद उन पर धार्मिक पूर्वाग्रह और भेदभाव के गंभीर आरोप लग रहे हैं. इस विवाद ने तब तूल पकड़ा जब इंटरनेट पर एक ग्रूमिंग पॉलिसी का दस्तावेज़ साझा किया गया, जिसमें अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग नियम होने का दावा किया गया.

क्या है पूरा विवाद?
सोशल मीडिया पर प्रसारित ‘लेंसकार्ट स्टाफ यूनिफॉर्म एंड ग्रूमिंग गाइड’ के अनुसार, स्टोर कर्मचारियों को काले रंग का हिजाब या पगड़ी पहनने की अनुमति दी गई थी. हालांकि, इसी दस्तावेज़ में कथित तौर पर हिंदू धर्म से जुड़े प्रतीकों जैसे बिंदी और तिलक लगाने पर प्रतिबंध की बात कही गई थी. जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, नेटिज़न्स ने कंपनी पर ‘दोहरे मानदंड’ अपनाने का आरोप लगाया. आलोचकों का कहना है कि एक ही कार्यस्थल पर एक धर्म के प्रतीकों को अनुमति देना और दूसरे को प्रतिबंधित करना सीधे तौर पर भेदभाव है.

पीयूष बंसल का स्पष्टीकरण
विवाद बढ़ता देख लेंसकार्ट के संस्थापक पीयूष बंसल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर मोर्चा संभाला. उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वायरल हो रहा दस्तावेज़ ‘पुराना’ (Outdated) है और यह कंपनी के वर्तमान रुख को नहीं दर्शाता है. बंसल ने स्पष्ट किया, “हमारी नीति में बिंदी और तिलक सहित किसी भी प्रकार की धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं है.” उन्होंने भ्रम के लिए माफी मांगते हुए कहा कि कंपनी समावेशिता और विविधता के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है.

संदेह और पारदर्शिता की मांग
बंसल की सफाई के बावजूद, सोशल मीडिया पर लोग संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं. कई उपयोगकर्ताओं ने तर्क दिया कि विवादित दस्तावेज़ पर फरवरी 2026 की तारीख अंकित है, ऐसे में इसे ‘पुराना’ कहना भ्रामक है. प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि यदि बंसल का दावा सही है, तो कंपनी को तुरंत अपनी नई और आधिकारिक ड्रेस कोड पॉलिसी सार्वजनिक करनी चाहिए. वहीं, हालिया विवाद और वैल्यूएशन की चिंताओं के कारण निवेशकों में सावधानी देखी गई है.

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