Wednesday, April 1, 2026

लक्ष्मी पूजन का प्रदोष काल मुहूर्त शाम 07:08 से रात 08:18 बजे तक रहेगा, निशिता काल मुहूर्त रात 11:41 से देर रात 12:31बजे तक रहेगा.

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दीपों का पर्व दीवाली 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा. यह दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष कृपा पाने का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक लक्ष्मी पूजन करने से जीवन में धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दीवाली की रात को मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जिन घरों में स्वच्छता, सजावट और श्रद्धा से पूजा होती है, वहां वे वास करती हैं. इसी कारण इस दिन साफ-सफाई, दीप सज्जा, वंदनवार और लक्ष्मी-गणेश पूजन का विशेष महत्व होता है.

कार्तिक मास की अमावस्या तिथि का प्रारंभ 20 अक्टूबर को प्रातः 03:44 बजे हो रहा है और इसका समापन 21 अक्टूबर को प्रातः 05:54 बजे होगा. इस प्रकार दीवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी.

लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

  • लक्ष्मी पूजन मुहूर्त: शाम 07:08 बजे से रात 08:18 बजे तक
  • प्रदोष काल: शाम 05:46 बजे से रात 08:18 बजे तक
  • वृषभ काल: रात 07:08 बजे से 09:03 बजे तक

लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल और वृषभ लग्न को सर्वोत्तम माना जाता है, क्योंकि यह समय मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाला और अत्यधिक फलदायक होता है.

दीवाली पूजा के नियम (Puja Niyam)

  • काले रंग के वस्त्र न पहनें.
  • किसी भी प्रकार के विवाद, क्रोध या नकारात्मक सोच से बचें.
  • घर और पूजा स्थल की पूरी सफाई करें.
  • खंडित मूर्ति या टूटे-फूटे बर्तन का प्रयोग न करें.
  • पूजा में केवल अक्षत (पूरे चावल), घी, कपूर, फूल और शुद्ध जल का उपयोग करें.
  • पूजा से पूर्व संकल्प लेना न भूलें

दीवाली पर दान का महत्व (Importance of Daan)
पूजन के बाद दान करना अत्यंत पुण्यदायक माना गया है. इस दिन अन्न, वस्त्र, धन, मिठाई, दीप, बर्तन और जरूरतमंदों को दान करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है. इससे जीवन में धन की स्थिरता बनी रहती है और सभी कार्यों में सफलता मिलती है.

मां लक्ष्मी के मंत्र (Lakshmi Mantras)

1. स्तुति मंत्र

या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी.

या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥

या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी.

सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती॥

2. बीज मंत्र (धन प्राप्ति हेतु)

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय

प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ ॥

इन मंत्रों का पूजन के दौरान जप करने से विशेष फल प्राप्त होता है. दीवाली का पर्व न केवल रोशनी और खुशियों का प्रतीक है, बल्कि यह दिन आत्मिक और भौतिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम अवसर है. मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर, नियमों का पालन करते हुए और ज़रूरतमंदों को दान देकर हम इस पर्व को और अधिक फलदायी बना सकते हैं.

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