Sunday, April 12, 2026

रेलवे बोर्ड के अनुसार वंदे भारत स्लीपर का नया प्रारूप एक वर्ष में परीक्षण के लिए तैयार होगा,जिसके बाद 120 ट्रेनों की आपूर्ति की जाएगी.

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नई दिल्ली: भारतीय रेलवे की सबसे बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी ‘वंदे भारत स्लीपर ट्रेन’ परियोजना को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है. रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सतीश कुमार ने घोषणा की है कि रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के नेतृत्व वाले संयुक्त उपक्रम द्वारा बनाई जा रही नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का प्रारूप (प्रोटोटाइप) अगले एक वर्ष के भीतर हर हाल में परीक्षण के लिए तैयार हो जाएगा.

स्थापना दिवस पर हुई घोषणा
आरवीएनएल के 21वें स्थापना दिवस समारोह में अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए रेलवे बोर्ड प्रमुख ने स्पष्ट किया कि वंदे भारत स्लीपर कंपनी की सबसे महत्वपूर्ण और प्रमुख परियोजनाओं में से एक है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इसका पहला प्रारूप एक वर्ष के भीतर अंतिम परीक्षण के लिए रेल ट्रैक पर उतार दिया जाएगा. इस सफल परीक्षण और सुरक्षा मानकों की हरी झंडी के बाद, कंपनी को भारतीय रेलवे को कुल 120 अत्याधुनिक स्लीपर ट्रेनों की बड़ी खेप की आपूर्ति करनी होगी.

समयसीमा को लेकर कयासों का दौर
हालांकि सतीश कुमार ने अपने संबोधन में किसी निश्चित महीने या तारीख का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया, लेकिन आरवीएनएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक सलीम अहमद ने हाल ही में संकेत दिया था कि यह प्रारूप जून 2026 तक तैयार होकर पेश किया जा सकता है. वहीं दूसरी ओर, रेलवे के कुछ अन्य वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों के अनुसार काम तो बेहद तेज गति से जारी है, लेकिन जमीनी हकीकत और जटिल डिजाइनों को देखते हुए जून 2026 तक इसका पूरा परीक्षण संभव नहीं लग रहा है और इसमें अगले वर्ष तक की आंशिक देरी हो सकती है.

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी ट्रेन
यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा में बेहतर आराम, सुरक्षा और सेमी-हाई-स्पीड का अनुभव देने के लिए इन ट्रेनों का निर्माण किया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार, देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की जोड़ी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 17 जनवरी 2026 को कामाख्या (गुवाहाटी) और हावड़ा (कोलकाता) के बीच हरी झंडी दिखाकर पहले ही रवाना किया जा चुका है.

वर्तमान में अन्य प्रस्तावित वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के संचालन और नए रूट्स को लेकर बाजार में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन इस संवेदनशील संबंध में रेल मंत्रालय ने अभी तक कोई आधिकारिक या स्पष्ट रूट घोषणा नहीं की है.

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