Sunday, April 12, 2026

रीनल आर्टरी स्टेनोसिस का मतलब है कि आपकी किडनी को खून सप्लाई करने वाली आर्टरी बहुत पतली हो जाती है, जिससे पूरे शरीर में…

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रीनल आर्टरी स्टेनोसिस एक गंभीर कंडीशन है जिसमें किडनी को खून सप्लाई करने वाली आर्टरीज (आर्टेरी) सिकुड़ जाती हैं. इस कंडीशन में किडनी तक ऑक्सीजन और न्यूट्रिएंट्स से भरपूर खून की ठीक से सप्लाई नहीं हो पाती है. मतलब, रीनल आर्टरी के सिकुड़ने की वजह से किडनी को ऑक्सीजन और न्यूट्रिएंट्स वाला खून पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है. यह कंडीशन आमतौर पर आर्टरीज के अंदर प्लाक (फैट और कोलेस्ट्रॉल) के जमने (एथेरोस्क्लेरोसिस) की वजह से होती है.

आपको बता दें कि किडनी को शरीर से वेस्ट प्रोडक्ट्स को अच्छे से फिल्टर करने और एक्स्ट्रा लिक्विड निकालने के लिए खून के तेज फ्लो की जरूरत होती है. किडनी शरीर के बहुत जरूरी अंग हैं, जो हर मिनट लगभग आधा कप खून फिल्टर करते हैं और यूरिन के जरिए शरीर से टॉक्सिन, यूरिया, एक्स्ट्रा पानी और सॉल्ट्स को बाहर निकालते हैं. ये ब्लड प्रेशर को रेगुलेट करते हैं, रेड ब्लड सेल्स बनाते हैं और हड्डियों को मजबूत रखते हैं. लेकिन इस स्थिति की वजह से किडनी में खून का फ्लो कम हो जाता है, जिसके वजह से यह अपना काम ठीक से काम नहीं कर पाती है. इसके कारण किडनी के टिशू डैमेज हो जाते हैं और पूरे शरीर में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, जिससे आखिर में किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है.

रीनल आर्टरी स्टेनोसिस के लक्षण
रीनल आर्टरी स्टेनोसिस (किडनी आर्टरी का सिकुड़ना) एक साइलेंट कंडीशन है, जिसके लक्षण अक्सर तब तक दिखाई नहीं देते जब तक आर्टरी बहुत ज्यादा सिकुड़ न जाए. क्योंकि यह धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए डॉक्टर अक्सर दूसरी समस्याओं की जांच करते समय इसका पता लगाते हैं. इसके साथ ही आपके शरीर में ये लक्षण दिखें

  • हाई ब्लड प्रेशर: अचानक हाई ब्लड प्रेशर की समस्या खासकर 30 साल से पहले या 55 साल के बाद.
  • ड्रग-रेसिस्टेंट ब्लड प्रेशर: हाई ब्लड प्रेशर जो अचानक हो जाता है या बिना किसी वजह के बिगड़ जाता है, और दवा लेने के बाद भी कंट्रोल में नहीं रहता.
  • किडनी के काम में कमी: ब्लड टेस्ट में किडनी के काम में अचानक या तेजी से कमी (जैसे क्रिएटिनिन का बढ़ना).
  • फ्लूइड रिटेंशन: शरीर में ज्याद पानी जमा होना, जिससे पैरों और टखनों में सूजन हो सकती है.
  • सांस फूलना: फेफड़ों में अचानक फ्लूइड जमा होने से सांस फूलना.
  • पेट में आवाज (एब्डॉमिनल ब्रूइट): डॉक्टर स्टेथोस्कोप से पेट के ऊपरी हिस्से में खून के बहाव की वजह से हूशिंग की आवाज सुन सकते हैं.
  • अन्य लक्षण: थकान, सिरदर्द, धुंधला दिखना, या पेशाब में बदलाव.

किडनी आर्टरी स्टेनोसिस के कारण

किडनी आर्टरी स्टेनोसिस के दो मुख्य कारण हैं…

  1. किडनी आर्टरीज पर जमाव, जिसे रीनल आर्टरीज भी कहते हैं. फैट, कोलेस्ट्रॉल और दूसरी चीजें, जिन्हें प्लाक कहते हैं, किडनी आर्टरी की दीवारों में और उन पर जमा हो सकती हैं. इसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहते हैं. जैसे-जैसे यह जमाव बढ़ता है, प्लाक सख्त हो सकता है. इससे ब्लड फ्लो कम हो जाता है और किडनी में निशान पड़ जाते हैं. समय के साथ, प्लाक आर्टरी को संकरा कर देता है. एथेरोस्क्लेरोसिस शरीर के कई हिस्सों में होता है. यह रीनल आर्टरी स्टेनोसिस का सबसे आम कारण है.
  2. फाइब्रोमस्कुलर डिस्प्लेसिया- फाइब्रोमस्क्युलर डिस्प्लेसिया (FMD) एक नॉन-एथेरोस्क्लेरोटिक, नॉन-इंफ्लेमेटरी वैस्कुलर बीमारी है, इसमें आर्टरीज की दीवारों में असामान्य सेल ग्रोथ से आर्टरीज सिकुड़ सकती हैं, एन्यूरिज्म हो सकता है या उनका डाइसेक्शन हो सकता है. यह ज्यादातर किडनी (रीनल) और कैरोटिड आर्टरीज पर असर डालता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का खतरा होता है. यह कंडीशन एक या दोनों किडनी पर असर डाल सकती है. एक्सपर्ट्स को अभी तक यह नहीं पता है कि फाइब्रोमस्कुलर डिस्प्लेसिया किस वजह से होता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कंडीशन अक्सर बचपन में शुरू होती है, जिसे कंजेनिटल कंडीशन कहा जाता है.

रिस्क फैक्टर
ज्यादातर, रीनल आर्टरी स्टेनोसिस किडनी की सिकुड़ी हुई आर्टरी की वजह से होता है. किडनी और शरीर के दूसरे हिस्सों में सिकुड़ी हुई आर्टरी के रिस्क फैक्टर में ये शामिल हैं…

  • ज्यादा उम्र
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • हाई कोलेस्ट्रॉल
  • डायबिटीज
  • मोटापा
  • स्मोकिंग और दूसरे तंबाकू का इस्तेमाल
  • शुरुआती दिल की बीमारी की फैमिली हिस्ट्री
  • एक्सरसाइज की कमी

कॉम्प्लीकेशंस

  • किडनी आर्टरी स्टेनोसिस के संभावित कॉम्प्लीकेशंस में शामिल हैं
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • क्रोनिक किडनी डिजीज या किडनी फेलियर- अगर हाई ब्लड प्रेशर को समय पर मैनेज न किया जाए तो किडनी डिजीज हो सकती है. किडनी फेलियर के लिए डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट से इलाज की जरूरत होती है.
  • पैरों में फ्लूइड रिटेंशन- इससे टखनों या पैरों में सूजन आ जाती है.

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