रांची: राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) का 69वां सम्मेलन दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में आयोजित होगा. इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए झारखंड विधानसभा की तैयारी शुरू हो गई है.
झारखंड शाखा की वार्षिक आम बैठक आयोजित
मंगलवार को झारखंड विधानसभा सभागार में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ झारखंड शाखा की वार्षिक आम बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो ने की. बैठक में झारखंड विधानसभा के सदस्यों के साथ-साथ विधानसभा के कई अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया.
कैप टाउन सम्मेलन और वैश्विक परिस्थिति पर चर्चा
बैठक के दौरान आगामी 69वें कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट कॉन्फ्रेंस (कैप टाउन) और वर्तमान वैश्विक परिस्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई. सदस्यों ने वैश्विक युद्ध की स्थिति पर गहरी चिंता जताई और राष्ट्रमंडल संसदीय संघ से शांति की अपील करने का आग्रह किया.
विधानसभा अध्यक्ष का संबोधन
विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो ने कहा कि राष्ट्रमंडल संसदीय संघ लोकतांत्रिक मूल्यों, स्वशासन की प्रतिबद्धता और वैश्विक संसदीय परंपराओं के साथ हमारे गहरे लगाव का प्रतीक है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मंच के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है.
राष्ट्रमंडल संसदीय संघ का इतिहास
राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की स्थापना सन् 1911 में ब्रिटिश सरकार द्वारा अपनी विभिन्न विधायिकाओं के बीच समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से की गई थी. कालांतर में यह मंच विस्तृत होकर आज एक वैश्विक लोकतांत्रिक मंच का रूप ले चुका है. वर्तमान में यह दुनिया के 56 देशों की 180 विधायी संस्थाओं का एक विशाल समूह है.
दिवंगत विधायकों के प्रति शोक संवेदना
बैठक में विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो ने दिवंगत विधायकों के निधन पर शोक व्यक्त किया और विधायी कार्यों में उनके योगदान के लिए आभार जताया.
मंत्री और बीजेपी विधायक के विचार
मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि इस बैठक के माध्यम से लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने वर्तमान वैश्विक युद्ध को देखते हुए शांति अपील का प्रस्ताव लाने पर जोर दिया. बीजेपी विधायक सीपी सिंह ने कहा कि राष्ट्रमंडल संसदीय संघ एक ऐसा मंच है जो विभिन्न देशों के संसद सदस्यों को एक-दूसरे से जोड़ता है.
पिछले सम्मेलन की जानकारी
गौरतलब है कि 68वां राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन गत वर्ष 5 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक ब्रिजटाउन, बारबाडोस में आयोजित हुआ था. उस सम्मेलन में विकास के केंद्र में मानव कारक, नीति निर्माण में लैंगिक समानता, दिव्यांगजनों और वंचित वर्गों के लिए समानता सुनिश्चित करना तथा समावेशी शासन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई थी और भविष्य की रूपरेखा तय की गई थी.


