रांची, 14 अक्टूबर 2026: मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बुधवार को रांची में चुनाव आयोग के कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, गिरफ्तारी और एसआईआर प्रक्रिया को समाप्त करने की मांग उठाई।
प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने चुनाव आयोग कार्यालय के आसपास बैरिकेडिंग की थी। राजद कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय से जुलूस निकाला और चुनाव आयोग के कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया।
ज्ञानेश कुमार के हमशक्ल के जरिए प्रतीकात्मक विरोध
प्रदर्शन के दौरान राजद कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के हमशक्ल को सामने लाकर प्रतीकात्मक विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच कराने और मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने की मांग की।
फॉर्म-6 के कॉलम पर भी उठाए सवाल
युवा राजद की प्रदेश उपाध्यक्ष गुलशन खातून ने फॉर्म-6 में दो अतिरिक्त कॉलम जोड़े जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कॉलम को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जोड़कर पेश किए जाने से लोगों में भ्रम पैदा हुआ।
गुलशन खातून ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। राजद नेताओं ने प्रक्रिया तत्काल रोकने और सूची से हटाए गए सभी पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने की मांग की।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए उनके इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग उठाई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज करने की भी मांग की।
ये आरोप और मांगें प्रदर्शनकारी नेताओं की ओर से रखी गईं। उपलब्ध जानकारी में चुनाव आयोग का पक्ष शामिल नहीं है।
महागठबंधन की एकजुटता का दावा
राजद नेताओं ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के विरोध में महागठबंधन एकजुट है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर रांची से लेकर दिल्ली तक आंदोलन तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन के जरिए राजद ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।
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