रांचीः राजधानी रांची स्थित भाकपा माले के राज्य कार्यालय में पार्टी के महासचिव कॉमरेड दीपांकर भट्टाचार्य ने मीडिया को संबोधित करते हुए चुनावी माहौल और विभिन्न राज्यों की राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से अपनी बात रखी. इस दौरान उन्होंने खास तौर पर चुनाव से पहले मतदाताओं के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाया और इसे अनुचित बताया.
चुनाव से पहले SIR कराना गलत है- महासचिव, सीपीआई माले
दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि पांच राज्यों में चुनाव से पहले SIR कराना गलत है, क्योंकि इससे बड़ी संख्या में मतदाताओं के वंचित होने का खतरा बढ़ जाता है. उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां इस प्रक्रिया का असर स्पष्ट रूप से देखा गया है और यह मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित करने वाला यह कदम है. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने इस गंभीर मुद्दे पर अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई है, जो चिंता का विषय है.
आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर उन्होंने असम की राजनीतिक स्थिति पर भी तीखा हमला बोला. पार्टी के महासचिव ने कहा कि राज्य में बीजेपी के खिलाफ जनता में भारी आक्रोश है.
हिमंता बिस्वा सरमा ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की- दीपांकर भट्टाचार्य
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री बनने के योग्य नहीं हैं और उनकी राजनीति समाज में नफरत फैलाने पर आधारित है. भट्टाचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि हिमंता बिस्वा सरमा ने झारखंड आकर भी इसी तरह की बयानबाजी की और यहां घुसपैठियों का मुद्दा उठाकर सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश की थी.
उन्होंने दावा किया कि इस बार असम की जनता बीजेपी को सत्ता से बाहर कर देगी और राज्य में बदलाव की लहर देखने को मिलेगी. उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने असम को विकास के बजाय विभाजन की राजनीति की ओर धकेला है.
कांग्रेस और अन्य वाम दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे- दीपांकर भट्टाचार्य
चुनावी रणनीति पर बात करते हुए दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि असम में भाकपा माले, कांग्रेस और अन्य वाम दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी, ताकि एक मजबूत और संयुक्त विकल्प जनता के सामने रखा जा सके. वहीं पश्चिम बंगाल में पार्टी वामपंथी दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव मैदान में उतरेगी.
डीएमके गठबंधन को पार्टी का समर्थन रहेगा- महासचिव, सीपीआई माले
दक्षिण भारत की स्थिति पर उन्होंने कहा कि तमिलनाडु और केरल में भाकपा माले किसी औपचारिक गठबंधन का हिस्सा नहीं होगी, लेकिन कुछ चुनिंदा सीटों पर अपने उम्मीदवार जरूर उतारेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु में डीएमके गठबंधन को और केरल में वामपंथी गठबंधन को उनकी पार्टी का समर्थन रहेगा.
उन्होंने कहा कि भाकपा माले देशभर में लोकतांत्रिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी और इन्हीं मुद्दों को चुनावी केंद्र में रखेगी.


