रांची:झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख नेता और ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के संस्थापक निर्मल महतो की आज जयंती है. गुरुवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जेल मोड़ स्थित शहीद निर्मल महतो की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य, विनोद पांडेय भी मौजूद रहे. अमर शहीद निर्मल महतो की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड निर्माण के लिए हुए आंदोलन में निर्मल महतो का अमूल्य योगदान है और उनके आदर्शों-विचारों को लेकर राज्य आगे बढ़ रहा है.
इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मैं निश्चित रूप से यह कह सकता हूं कि यह युवा राज्य और (हमारे वीर शहीद निर्मल महतो जी, जब उनकी हत्या हुई थी तब वह भी युवा ही थे) हमारी युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम सब नौजवान शहीद निर्मल महतो के राज्य निर्माण आंदोलन में योगदान और उनके विचारों पर गर्व करते हैं. मुख्यमंत्री ने यह संकल्प दोहराया कि आनेवाले समय में अमर शहीद निर्मल महतो के विचारों को हर हाल में जिंदा रखते हुए राज्य आगे बढ़ेगा.
निर्मल महतो का जन्म 25 दिसंबर 1950 को वर्तमान झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के उलिआन गांव में हुआ था. उनके पिता का नाम जगबंधु महतो और माता पिरिआ बाला महतो थीं. वह अपने माता-पिता के चौथे पुत्र थे. निर्मल महतो ने जमशेदपुर वर्कर्स यूनियन हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की थी. उसके बाद कॉपरेटिव कॉलेज जमशेदपुर से बीए की पढ़ाई पूरी की. कॉलेज जीवन से ही निर्मल महतो की रुचि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष और राजनीति की ओर होने लगा था. उन्होंने सूदखोरों के खिलाफ आंदोलन चलाया फिर अलग झारखंड राज्य के लिए चलाये गए आंदोलन से जुड़ गए. दिशोम गुरु शिबू सोरेन इनके आक्रामक छवि से काफी प्रभावित थे. निर्मल महतो ने छात्र संगठन “ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन” (आजसू) का गठन किया.
झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन ने निर्मल महतो के आंदोलनकारी छवि को देखते हुए 1980 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) में शामिल किया था. निर्मल महतो झारखंड मुक्ति मोर्चा के दो बार अध्यक्ष भी चुने गए. पहली बार 6 अप्रैल 1984 को बोकारो में झामुमो केंद्रीय समिति की बैठक में अध्यक्ष बने. उसके बाद 28 अप्रैल 1986 के दूसरे केंद्रीय महाधिवेशन में दूसरी बार निर्मल महतो को झारखंड मुक्ति मोर्चा का अध्यक्ष चुना गया.
8 अगस्त 1987 में जमशेदपुर में हुई थी हत्या
निर्मल महतो की हत्या 8 अगस्त 1987 को जमशेदपुर के बिष्टुपुर में नार्दन टाउन स्थित चमरिया गेस्ट हाउस के सामने गोली मारकर उस समय कर दी गई थी, जब वे अपने सहयोगियों के साथ खड़े होकर बातचीत कर रहे थे.


