रांची: जून महीने में झारखंड में मानसून में सामान्य से 54% कम बारिश हुई है. अलनीनो के प्रभाव से इस साल सामान्य से काफी कम बारिश होने और राज्य में संभावित सुखाड़ की स्थिति को लेकर समीक्षा बैठक की गयी.
- कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने शुक्रवार को पशुपालन भवन, हटिया (हेसाग) में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. जिसमें कृषि विभाग के सचिव, विशेष सचिव, विभिन्न निदेशालयों के निदेशक एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि सभी जिलों के उपायुक्त एवं संबंधित पदाधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े.
- इस बैठक में मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि संभावित सुखाड़ की स्थिति में सरकार की सभी योजनाओं का लाभ अंतिम किसान तक समयबद्ध तरीके से पहुंचना सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में अधिकारियों की जवाबदेही और संवेदनशीलता ही किसानों की सबसे बड़ी ताकत होगी.
- कृषि मंत्री ने मिलेट मिशन को व्यापक स्तर पर सफल बनाने के लिए सभी जिलों में तीन दिवसीय विशेष पंजीकरण अभियान चलाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित कर अधिक से अधिक किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि कम पानी में होने वाली फसलों को बढ़ावा मिल सके.
- उन्होंने संभावित सुखाड़ की स्थिति में पशुओं में फैलने वाले संभावित रोगों की रोकथाम के लिए संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर व्यापक टीकाकरण अभियान चलाने का निर्देश दिया. पशुपालकों को जागरूक करने और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया.
- कृषि मंत्री ने उर्वरकों की कालाबाजारी पर विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई की समीक्षा करते हुए बताया कि राज्य में गठित टास्क फोर्स द्वारा अब तक 436 छापेमारी की गई है. इस दौरान 11 लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है तथा एक मामले में एफआईआर दर्ज की गई है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता या कालाबाजारी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
- मंत्री ने कहा कि झारखंड देश का पहला राज्य है जिसने संभावित सुखाड़ को देखते हुए सबसे पहले अपना कंटिन्जेंसी प्लान केंद्र सरकार को उपलब्ध कराया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मई माह में ही आकस्मिक कार्ययोजना तैयार कर ली थी और उसी के प्रभावी क्रियान्वयन की बिंदुवार समीक्षा की जा रही है.
- मीडिया से बातचीत करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि अलनीनो के प्रभाव के कारण देश के कई राज्यों की तरह झारखंड में भी सामान्य से लगभग 54 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जो चिंता का विषय है. हालांकि सरकार ने समय रहते सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.
- उन्होंने बताया कि उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार पलामू जिला सर्वाधिक प्रभावित है, जबकि उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के कुछ जिलों में भी वर्षा की कमी दर्ज की गई है. वर्तमान में राज्य के लगभग 20 से 30 प्रतिशत क्षेत्र में ही बिचड़ा तैयार हो पाया है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले दस दिनों में अच्छी वर्षा होने की संभावना है. यदि ऐसा होता है तो 15 जुलाई तक बुआई का रकबा बढ़ाकर लगभग 60 प्रतिशत तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है.
- कृषि मंत्री ने किसानों से मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए मड़ुआ, दलहन एवं तिलहन जैसी कम पानी में होने वाली वैकल्पिक फसलों को अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि कई जिलों में किसान इन फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जो भविष्य की दृष्टि से सकारात्मक संकेत है.
- उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज एवं पर्याप्त मात्रा में उर्वरक समय पर उपलब्ध कराया जाए तथा वितरण व्यवस्था पर सतत निगरानी रखी जाए. मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा, कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखने और संभावित सूखाड़ की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है.
- इसके साथ ही भूमि संरक्षण प्रभाग की समीक्षा करते हुए मंत्री ने विभिन्न निर्देश दिए हैं बैठक के दौरान अधिकारियों को संबोधित करते हुए निर्देश दिया गया. मंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में सभी योजनाओं का कार्य निर्धारित समय-सीमा के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए. इस संबंध में निदेशालय द्वारा शीघ्र ही विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया जाएगा, जिसका सभी जिलों द्वारा कड़ाई से पालन किया जाना अनिवार्य होगा.
- साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि वर्ष के अंतिम महीनों में कार्य प्रारंभ करने तथा व्यय दर्शाने की प्रवृत्ति समाप्त की जाए, क्योंकि इससे अनावश्यक देनदारियां (Liabilities) बढ़ती हैं. मौसम अथवा जलभराव जैसी परिस्थितियों को कार्य में विलंब का कारण न बनाते हुए समय पर कार्य निष्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए.
- इस बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केवल माननीय विधायकों की नई (Fresh) अनुशंसाओं के आधार पर ही योजनाओं का चयन किया जाएगा. जिन योजनाओं की अनुशंसा पिछले वर्ष की गई थी, लेकिन जिन पर कार्य प्रारंभ नहीं हो सका, उनके लिए संबंधित माननीय विधायक से नए लेटर पैड पर पुनः अनुशंसा प्राप्त करना अनिवार्य होगा. किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति से बचने के लिए केवल नई अनुशंसाओं को ही स्वीकार किया जाएगा.
बिरसा पक्का चेक डैम योजना के संबंध में निर्देश दिया गया कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम-से-कम एक संभावित स्थल का भौतिक सत्यापन (Site Verification) कर उसकी रिपोर्ट माह के अंत तक निदेशालय को उपलब्ध कराई जाए. साथ ही, संबंधित माननीय विधायक से भी योजना के लिए अनुशंसा प्राप्त करने का प्रयास किया जाए.
इस बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि लंबित बिलों के संबंध में आवश्यक प्रक्रियाओं को लेकर पूर्व की सभी शंकाओं का समाधान कर दिया गया है. जिन बिलों के लिए आवश्यक अनुमोदन प्राप्त हो चुका है, उन्हें बिना विलंब निदेशालय को भेजने के निर्देश दिए गए, ताकि भुगतान प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जा सके.


