रांची: राजधानी के अटल स्मृति वेंडर मार्केट में इन दिनों नगर निगम के री-लॉटरी फैसले को लेकर माहौल गरमाया हुआ है. बुधवार को इस मुद्दे के विरोध में कई दुकानों के शटर बंद रहे. हालांकि दिलचस्प बात यह है कि इस फैसले पर खुद दुकानदारों के बीच एकराय नहीं बन पाई है. जहां एक पक्ष री-लॉटरी का खुलकर विरोध कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे नियमसम्मत और आवश्यक कदम बता रहा है.
दरअसल, वर्ष 2019 में सर्जना चौक से कचहरी चौक तक फुटपाथ पर व्यवसाय करने वाले विक्रेताओं को लॉटरी प्रणाली के जरिए अटल स्मृति वेंडर मार्केट में स्थान और चबूतरे आवंटित किए गए थे. यह आवंटन तीन वर्षों की अवधि के लिए किया गया था. अब उस अवधि के पूरा होने के बाद नगर निगम ने दुकानों की दोबारा लॉटरी कराने का निर्णय लिया है, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है.
री-लॉटरी का विरोध कर रहे दुकानदार
री-लॉटरी का विरोध कर रहे दुकानदारों का कहना है कि उन्हें तीन साल बाद नवीनीकरण (रीन्यूअल) का आश्वासन दिया गया था. उनका आरोप है कि बिना किसी ठोस कारण के फिर से लॉटरी निकालना उनके साथ अन्याय है. कई दुकानदारों ने दावा किया कि आवंटन के समय उन्हें जो दस्तावेज दिए गए थे. उनमें स्थायित्व का संकेत था. ऐसे में अचानक दोबारा लॉटरी की प्रक्रिया शुरू करना उनके व्यवसाय और भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.
विरोध करने वाले दुकानदारों ने यह भी आरोप लगाया कि निगम के कुछ अधिकारी चुनिंदा लोगों के साथ मिलकर यह फैसला आगे बढ़ा रहे हैं. उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत से उन्होंने ग्राहकों का भरोसा और पहचान बनाई है. अगर दोबारा लॉटरी हुई और स्थान बदल गया, तो उनकी आय पर प्रतिकूल असर पड़ेगा.
कुछ दुकानदारों ने किया नियम का समर्थन
दूसरी ओर, वर्ष 2019 में मार्केट के पीछे वाले हिस्से में दुकान पाने वाले कुछ दुकानदार री-लॉटरी के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं. उनका तर्क है कि यदि प्रक्रिया पारदर्शी है और नियमों के तहत हो रही है, तो इससे किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए. उनका कहना है कि लॉटरी व्यवस्था समान अवसर सुनिश्चित करती है और इससे निष्पक्षता बनी रहती है.
नगर निगम ने 31 जनवरी 2026 को जारी पत्र में स्पष्ट किया है कि एकरारनामा की शर्तों के अनुसार सरकार द्वारा जारी आदेशों और नियमों का पालन अनिवार्य है. 7 जनवरी को निगम प्रशासक की अध्यक्षता में हुई बैठक में तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद री-लॉटरी कराने का निर्णय लिया गया. फिलहाल वेंडर मार्केट में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. दुकानदारों की दोहरी राय ने मामले को और जटिल बना दिया है. अब सभी की नजर निगम प्रशासन और संभावित आगे की कार्रवाई पर टिकी है.


