Tuesday, March 17, 2026

रांची के साथ साथ झारखंड के ज्यादातर जिलों के ब्लड बैंकों में खून की कमी हो गयी है.

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रांची: राजधानी रांची के दो प्रमुख सरकारी ब्लड बैंक सहित राज्य के ज्यादातर जिलों के ब्लड बैंकों में खून की कमी हो गयी है. इस बात को स्वास्थ्य मंत्री ने भी स्वीकार किया और ठोस कदम उठाने की बात कही है.

रांची के सदर अस्पताल में जहां सभी ग्रुप को मिलाकर महज 37 यूनिट टेस्टेड ब्लड बचा है. वहीं राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के ब्लड बैंक में भी सभी ग्रुप को मिलाकर महज 103 यूनिट टेस्टेड ब्लड बचा है. जबकि रिम्स ब्लड बैंक से हर दिन 100 से ज्यादा यूनिट और सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से हर दिन औसतन 30 यूनिट ब्लड मरीजों को दी जाती है.

ऐसे में राजधानी रांची के इन दोनों ब्लड बैंक में ब्लड स्टॉक न के बराबर बचा है. सदर अस्पताल ब्लड बैंक की स्टाफ गीतांजली कहती हैं कि उम्मीद है कि आज और कल लगने वाले ब्लड डोनेशन कैंप से रक्त अधिकोष में ब्लड यूनिट की संख्या बढ़ेगी.

राज्य के ब्लड बैंकों में खून की कमी की बात स्वीकारते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि चाईबासा ब्लड बैंक की घटना के बाद यह समस्या कई वजहों से बढ़ी हैं. लेकिन यह आश्वासन दिया है कि राज्य के ब्लड बैंकों में खून की कमी दूर करने के लिए सरकार एक ठोस व्यवस्था करने जा रही है. वह खून की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक एजेंसी नियुक्त करने जा रहे हैं जो डिमांड के अनुसार खून उपलब्ध कराएगा.

एक नजर डाले सदर अस्पताल और रिम्स के ब्लड बैंक के स्टॉक पर

सदर अस्पताल ब्लड बैंक में रक्त (PRBC) के स्टॉक की स्थिति

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B1001
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सदर अस्पताल ब्लड बैंक में FFP यानी फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा के स्टॉक की स्थिति

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रिम्स ब्लड बैंक में खून (PRBC) की स्थिति

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A1203
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रिम्स ब्लड बैंक में FFP यानी फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा के स्टॉक की स्थिति

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डोनेशन कैंप में भी बहुत कम हो रहे रक्तदान

राजधानी रांची के ही दो प्रमुख सरकारी ब्लड बैंक में खून की उपलब्धता सामान्य दिनों की अपेक्षा एक तिहाई से भी कम बचा है. रिम्स ब्लड बैंक के स्टाफ कहते हैं कि पहले उनके यहां 400-500 यूनिट ब्लड का स्टॉक रहता था लेकिन आज इसकी संख्या 103 है. उन्होंने कहा कि रक्त समूह बी-निगेटिव, एबी निगेटिव और ओ निगेटिव का एक भी यूनिट उपलब्ध नहीं है जबकि ए निगेटिव का सिर्फ 03 यूनिट ब्लड बचा हुआ है.

रिम्स ब्लड बैंक स्टाफ राजीव कहते हैं कि जरूरत लोगों में जागरूकता लाने और रक्तदान के लिए लोगों को प्रेरित करने की है. वहीं सदर अस्पताल के ब्लड बैंक की स्टाफ गीतांजली कहती हैं कि अगर आज की तारीख में देखा जाए तो 50 से कम यूनिट टेस्टेड ब्लड उनके स्टॉक में है. जबकि सदर डे केयर में थैलसेमिक बच्चों को हर दिन औसतन 15-20 यूनिट PRBC दिया जाता है. वहीं सदर अस्पताल ओटी, गायनी, ऑन्कोलॉजी मिलाकर हर दिन 15-20 यूनिट की खपत है. ऐसे में हर दिन औसतन 30-40 यूनिट रक्त की जरूरत होती है. गीतांजलि कहती हैं कि अब ब्लड यूनिट आवक की उम्मीदें विधानसभा और अन्य जगहों पर चल रहे ब्लड डोनेशन कैंप से है.

एजेंसी हायर कर दूर की जाएगी ब्लड बैंक में खून की कमी की समस्या- स्वास्थ्य मंत्री

राज्य भर के ब्लड बैंकों में खून की कमी की बात स्वीकारते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि चाईबासा ब्लड बैंक की घटना के बाद से यह समस्या कई वजहों से बढ़ी है. जिसे वह मीडिया से साझा नहीं कर सकते लेकिन सरकार राज्य के लोगों को जरूरत के समय बिना परेशानी ब्लड मिल जाए, इसके लिए ठोस व्यवस्था करने जा रही है.

मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि राज्यवासियों को जरूरत के समय खून की कमी न हो इसके लिए विभाग एजेंसी नियुक्त करने जा रही है. यह प्रक्रिया टेंडर में है और जल्द यह योजना धरातल पर उतरेगा. उन्होंने कहा कि एजेंसी द्वारा एक टॉल फ्री नंबर भी जारी किया जाएगा. जिस पर एक कॉल करते ही खून की उपलब्धता सुनिश्चित कराना उस एजेंसी की जिम्मेदारी होगी.

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