रांची: बिरसा कृषि विश्वविद्यालय प्रांगण में 14 मार्च से शुरू हुए तीन दिवसीय एग्रोटेक किसान मेला को देखने रविवार को झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो बीएयू पहुंचे. मेला परिसर का भ्रमण करने के बाद विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने कहा कि किसानों की मेंहनत और उपज का ज्यादा लाभ बिचौलिये और आढ़़तिये उठा लेते हैं, इस व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है. उन्होंने कहा कि खेती-बाड़ी से कृषकों का मन नहीं उचटे, इसके लिए उनके कामकाज को अपेक्षित सम्मान, पहचान और लाभकारी बाजार उपलब्ध कराने की जरूरत है.
पशु पक्षी प्रदर्शनी का स्पीकर ने किया उद्घाटन
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में चल रहे तीनदिवसीय एग्रोटेक किसान मेला के दूसरे दिन स्पीकर रवीन्द्रनाथ महतो ने मेला परिसर में लगाए गए पशु-पक्षी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लक्ष्य के साथ शुरू की गयी बढ़ी बजट वाली कई योजनायें लम्बी अवधि के कार्यान्वन के बाद भी या तो आज तक अधूरी रह हैं या फिर फेल हो गयी हैं, इसलिए कृषि विकास के नाम पर फिजूलखर्ची से बचना चाहिए.
विधानसभा अध्यक्ष की कृषि विकास से जुड़ी है सोच
उन्होंने राज्यभर के जलाशयों का गाद हटाकर उसकी जल संग्रहण क्षमता बढाने तथा वर्षा जल के संरक्षण पर भी जोर दिया.
स्पीकर रवींद्रनाथ महतो का विश्वविद्यालय परिसर में स्वागत करते हुए बीएयू के कुलपति डॉ. एससी दुबे ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि खेतीबाड़ी के साथ विधानसभा अध्यक्ष का प्रत्यक्ष जुड़ाव और कृषि विकास सम्बन्धी उनकी सोच अद्भुत है.
पशुओं में लम्पी वायरस
पशु चिकित्सा संकाय के डीन डॉ. एमके गुप्ता ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का पशुओं के जीवन, स्वास्थ्य और उत्पादकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. लम्पी, मेस्टाइटिस, बकरियों में पीपीआर और सूअर में अफ्रीकन स्वाइन फीवर जैसी बीमारियाँ बढ़ रही हैं, इनसे बचाव के लिए सरकार की और से फ्री जांच और टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध है.
पशु-पक्षी प्रदर्शनी में परमेश्वर साहू को सर्वाधिक पुरस्कार
प्रो. अलोक कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में आयोजित पशु-पक्षी प्रदर्शनी में किसान डेयरी फार्म, ओरमांझी के परमेश्वर साहू को सर्वाधिक पुरस्कार प्राप्त हुए . संकर वयस्क बाछी, संकर गाय और देशी गाय वर्ग में उनके गोवंश को प्रथम पुरस्कार दिया गया.
देशी वयस्क बाछी वर्ग में होचर की आशु कुमारी को प्रथम पुरस्कार
दिन के समय एग्रोटेक मेला में दिन में महिला कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य के विभिन्न भागों से आयी महिला किसानों ने भाग लिया. गोष्ठी की मुख्य अतिथि राज्य सभा सदस्य डॉ. महुआ माजी ने कहा कि पूर्व में महिला तस्करी और डायन के आरोप में हत्या के लिए चर्चित यह राज्य हेमंत सोरेन सरकार के प्रयासों के कारण अब महिला स्वावलंबन और सशक्तिकरण के लिए जाना जाने लगा है.
चैतन्य महाप्रभु की देन है झारखंड
उन्होंने कहा कि झारखंड नाम सबसे पहले चैतन्य महाप्रभु ने दिया था. जब वह इधर से पुरी जाने के लिए गुजर रहे थे और क्षेत्र की हरियाली एवं जंगलझाड़ देखकर प्रभावित हुए थे. झारखंड के पर्व और हमारे सारे संस्कार (जन्म, मृत्यु, विवाह आदि) जल, जंगल और जमीन से जुड़े हैं जिनके संरक्षण-संवर्धन से बीएयू का गहरा नाता है.
किसी महिला के साथ भेदभाव बर्दाश्त नहीं
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने आयोग के कल्याण कार्यक्रमों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जनजाति के नाम पर किसी महिला के साथ भेदभाव, गलत व्यवहार या अत्याचार होता है तो वे न्याय के लिए आयोग में शिकायत कर सकती हैं.
गोष्ठी में प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. रेखा सिन्हा, पशुचिकित्सा वैज्ञानिक डॉ. स्वाति सहाय, केवीके वैज्ञानिक डॉ. किरण कंडीर, लोहरदगा की कृषि उद्यमी अनीता टोप्पो, दरिसाई, पूर्वी सिंहभूम की कृषक मुन्नी कुमारी, किस्को, लोहरदगा की सरस्वती देवी तथा बसिया, गुमला की सुजंती देवी ने भी अपने अपने विचार रखे.


