Thursday, October 1, 2026

योगेंद्र साव मामले में FIR नहीं होने पर झासा का विरोध, काला बिल्ला लगाकर काम पर पहुंचे अधिकारी.

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हजारीबाग: सदर अंचलाधिकारी सह खास महल पदाधिकारी आशुतोष कुमार के साथ 18 सितंबर को हुई कथित बदसलूकी और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं होने पर झारखंड राज्य प्रशासनिक सेवा संघ (झासा) ने विरोध जताया है। संघ के आह्वान पर 1 अक्टूबर को हजारीबाग जिले के प्रशासनिक अधिकारियों ने काला बिल्ला लगाकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद हजारीबाग के कैंटोनमेंट मौजा स्थित करीब 50 डिसमिल खास महल भूमि पर अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान सामने आया था। 18 सितंबर को सदर सीओ आशुतोष कुमार के नेतृत्व में टीम कार्रवाई के लिए पहुंची थी। मौके पर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और अधिकारियों के बीच तीखी बहस होने की रिपोर्ट सामने आई थी। प्रशासन का कहना है कि संबंधित भूमि सरकारी खास महल जमीन है और वहां अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही थी।

झासा ने की कार्रवाई की मांग

झासा की हजारीबाग जिला इकाई के अध्यक्ष महेंद्र छोटन उरांव के अनुसार, घटना के बाद संबंधित थाना में आवेदन दिया गया था, लेकिन अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं होने से संघ में नाराजगी है। संघ ने पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

इससे पहले झासा की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी इस मामले पर चर्चा हुई थी। संघ ने अधिकारियों की सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यों के दौरान उन्हें आवश्यक संस्थागत सहयोग देने की मांग उठाई थी।

चरणबद्ध आंदोलन का पहला चरण

काला बिल्ला लगाकर काम करना झासा की ओर से घोषित विरोध कार्यक्रम का शुरुआती चरण बताया गया है। संघ ने संकेत दिया है कि यदि मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो आगे चरणबद्ध आंदोलन किया जा सकता है।

फिलहाल मामले में प्रशासन और संघ की ओर से कार्रवाई की मांग सामने आई है। वहीं, 18 सितंबर की घटना से जुड़े आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित जांच और प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

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