यूनियन बजट 2026-27 को उद्योग जगत से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है. विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त मंत्री द्वारा किए गए सुधारोन्मुख़ ऐलान आर्थिक विकास को तेज करेंगे और आने वाले वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार सृजन में मददगार साबित होंगे.
बजट में दीर्घकालिक दृष्टिकोण साफ नजर आता है. इसमें बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, व्यवसाय करने में आसानी बढ़ाने और संरचनात्मक चुनौतियों का समाधान करने के लिए व्यापक उपाय शामिल हैं. उनका कहना है कि बजट का असर समय के साथ विशेष रूप से रोजगार सृजन और आर्थिक विस्तार में दिखाई देगा.
संरचनात्मक बदलाव पर जोर
PHD चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि बजट में तात्कालिक आकर्षक उपायों की बजाय दीर्घकालिक सुधारों पर ध्यान दिया गया है. उन्होंने इसे ‘T20-स्टाइल’ तात्कालिक कदमों के बजाय स्थायी नीतियों के रूप में देखा.
जुनेजा ने बताया कि सरकार की रणनीति आर्थिक ढांचे को मजबूत करने वाले सुधार लागू करने पर केंद्रित है, जो आने वाले वर्षों में लगातार सकारात्मक परिणाम देंगे. उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और उतार-चढ़ाव के समय में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है.
उन्होंने सरकार की ‘तीन कर्तव्य’ नीति का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें शामिल हैं.
- आर्थिक विकास को तेज और सतत बनाना,
- नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उन्हें भारत की समृद्धि यात्रा का सक्रिय भागीदार बनाना,
- विकास के अवसरों तक समावेशी पहुंच सुनिश्चित करना.
इन प्राथमिकताओं का उद्देश्य वैश्विक संकट के बावजूद भारत के आर्थिक और सामाजिक आधार को मजबूत करना है.
STT सुधारों का मकसद अटकलों को रोकना
स्टॉक्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) से जुड़े बदलावों पर जुनेजा ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य केवल शॉर्ट-टर्म सट्टेबाजी को रोकना है. उन्होंने कहा कि यह लंबी अवधि के गंभीर निवेशकों पर कोई नकारात्मक असर नहीं डालेगा. उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सुधार बाजार स्थिरता बनाए रखने में मदद करेंगे और मध्यम से दीर्घकालिक आर्थिक विकास को समर्थन देंगे.
डेटा सेंटर और डिजिटल निवेश को बढ़ावा
पूर्व DLF CEO और PHDCCI सदस्य राजीव तलेवार ने सरकार के डेटा सेंटर से जुड़े उपायों को विकास का प्रमुख स्तंभ बताया. उनका कहना है कि इस क्षेत्र में किए गए ऐलान निवेश और क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे, जिससे भारत डिजिटल और तकनीकी हब के रूप में मजबूत स्थिति में आएगा.
तलेवार ने बजट में प्रस्तावित 12.2 लाख करोड़ रुपये की पूंजीगत व्यय (Capex) की भी सराहना की. उनका कहना है कि इससे बुनियादी ढांचे में सुधार होगा, सप्लाई चेन की बाधाओं को कम किया जा सकेगा और आर्थिक दक्षता बढ़ेगी.
वित्तीय अनुशासन और स्थिरता
तलेवार ने कहा कि सरकार की वित्तीय अनुशासन और कर्ज समेकन पर लगातार जोर देने की नीति (2021–22 से) ठोस परिणाम दे रही है. चालू वित्त वर्ष 2026 के लिए राजकोषीय घाटा 4.4 प्रतिशत पर सफलतापूर्वक बना रहा, जबकि 2027 के बजट में इसे 4.3 प्रतिशत रखा गया है.
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी पूंजीगत व्यय और वित्तीय अनुशासन का मेल नीति स्थिरता का मजबूत संकेत देता है, जो निवेशकों का भरोसा बढ़ाने और सतत आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने में सहायक होगा.
भारत का डिजिटल भविष्य
मोटीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के अध्यक्ष एवं सह-संस्थापक रामदेव अग्रवाल ने कहा कि बजट भारत के डिजिटल भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है. डेटा सेंटर पर 2047 तक 100 प्रतिशत कर छुट देना एक बड़ा सुधार है.
उन्होंने इसे 1990 के दशक के सॉफ्टवेयर बूम से तुलना की और कहा कि अब भारत ‘एआई फैक्ट्री ऑफ द वर्ल्ड’ बनने की दिशा में बढ़ रहा है. निवेश और आधारभूत ढांचे में बड़े पैमाने पर पूंजीगत खर्च इस दिशा में मदद करेगा.
उन्होंने हालांकि STT के प्रभाव पर चेतावनी दी कि उच्च-आवृत्ति और आर्बिट्रेज ट्रेडिंग पर इसका असर पड़ सकता है, जिससे बाजार में लिक्विडिटी और लीवरेज थोड़े समय के लिए प्रभावित हो सकते हैं.
स्थिरता पर जोर, हाइप नहीं
बजाज ब्रोकिंग के प्रबंध निदेशक और CEO मनीष जैन* ने कहा कि बजट 2026 का मुख्य उद्देश्य भरोसा बनाना और दीर्घकालिक दृष्टि स्थापित करना है, न कि तात्कालिक उछाल. उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय में 12.2 लाख करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता और विनिर्माण-प्रधान विकास पर जोर, भारत की मैक्रो इकोनॉमिक स्थिरता को दर्शाते हैं. पूंजी बाजार के दृष्टिकोण से यह दीर्घकालिक निवेश और स्पष्टता के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है.
निवेश के लिए विविध अवसर
विशेषज्ञों का कहना है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर, बायोफार्मा और रणनीतिक विनिर्माण पर बजट का फोकस निवेश के अवसर बढ़ाता है. इससे निवेश केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा.
हालांकि कुछ क्षेत्रों में लेनदेन लागत बढ़ सकती है, दीर्घकालिक निवेशकों के लिए निरंतरता और वित्तीय अनुशासन अधिक महत्वपूर्ण होंगे. मनीष जैन ने कहा कि पूंजी बाजार अब गुणवत्ता, मजबूत बैलेंस शीट और संरचनात्मक रूप से भारत की विकास थीम से जुड़े व्यवसायों को प्राथमिकता देगा.


