Sunday, August 9, 2026

मोरहाबादी में आदिवासी संस्कृति का रंग, एक साथ गूंजे सैकड़ों मांदर-नगाड़े; 32 जनजातीय समुदायों ने दिखाई विरासत.

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रांची: राजधानी रांची का मोरहाबादी मैदान रविवार को झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का जीवंत केंद्र बना रहा। झारखंड आदिवासी महोत्सव में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से कलाकार पारंपरिक परिधान, वाद्ययंत्र और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ पहुंचे। मैदान में मांदर और नगाड़ों की सामूहिक धुन से उत्सव का माहौल बना रहा।

महोत्सव में छोटे-बड़े करीब एक हजार नगाड़ों के साथ कलाकारों ने पारंपरिक धुनें प्रस्तुत कीं। महिला और पुरुष दोनों कलाकारों ने उत्साहपूर्वक नगाड़ा और मांदर बजाकर अपनी सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की।

पहली बार एक मंच पर दिखीं 32 जनजातीय पहचानें

इस आयोजन की खास बात यह रही कि झारखंड के 32 जनजातीय समुदायों की पारंपरिक संस्कृति और वेशभूषा को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया गया। अलग-अलग समुदायों के प्रतिनिधि अपने पारंपरिक पहनावे और वाद्ययंत्रों के साथ महोत्सव में शामिल हुए।

आयोजन में राज्य की पांच जनजातीय भाषाओं से संबंधित गतिविधियां भी रखी गयीं। इसके साथ ही चित्रकारों ने अपनी कलाकृतियों और पेंटिंग के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं को प्रदर्शित किया।

करीब छह हजार कलाकारों ने दी प्रस्तुति

महोत्सव में लगभग छह हजार कलाकारों की भागीदारी रही। अलग-अलग समूहों ने पारंपरिक गीत, नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियां दीं। मांदर और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों के बीच पूरा मैदान सांस्कृतिक रंग में डूबा नजर आया।

आयोजन के जरिए झारखंड की विभिन्न जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और सांस्कृतिक विविधता को एक साथ सामने लाने का प्रयास किया गया।

संघर्ष और आदिवासी नायकों की गाथा भी दिखाई गयी

महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ आदिवासी समाज के संघर्ष और अधिकारों के इतिहास को भी प्रदर्शित किया गया। करीब 10 मिनट के ऑडियो-विजुअल कार्यक्रम के माध्यम से शिबू सोरेन के संघर्ष और बलिदान को दर्शाया गया।

इसके अलावा 1857 के विद्रोह, बिरसा मुंडा के उलगुलान और झारखंड के अन्य आदिवासी वीरों के संघर्ष एवं बलिदान को भी कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया। इस प्रस्तुति के माध्यम से नई पीढ़ी को अपने इतिहास और संघर्ष की परंपरा से जोड़ने का संदेश दिया गया।

अरगोड़ा से निकला पैदल मार्च

महोत्सव के दौरान विभिन्न आदिवासी संगठनों ने भी अपनी भागीदारी दर्ज करायी। अरगोड़ा क्षेत्र से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ पैदल मार्च करते हुए अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचे।

वहां परमवीर चक्र विजेता अल्बर्ट एक्का की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने उनके योगदान को याद किया।

बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि देने निकली उलगुलान यात्रा

जय आदिवासी परिषद की ओर से भी उलगुलान यात्रा आयोजित की गयी। यात्रा के दौरान भगवान बिरसा मुंडा के समाधि स्थल और जेल परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी।

यात्रा में शामिल लोगों ने आदिवासी अधिकारों, सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी।

संस्कृति के साथ एकजुटता का संदेश

मोरहाबादी मैदान में आयोजित महोत्सव ने जहां पारंपरिक नृत्य, गीत और वाद्ययंत्रों के जरिए झारखंड की सांस्कृतिक विविधता को सामने रखा, वहीं विभिन्न संगठनों की भागीदारी ने सामाजिक एकजुटता का संदेश भी दिया।

आयोजन में आदिवासी समाज की कला, इतिहास, भाषा और परंपराओं को एक साथ प्रस्तुत किया गया, जिससे झारखंड की बहुरंगी सांस्कृतिक विरासत की व्यापक झलक देखने को मिली।

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