Saturday, March 14, 2026

मेक्सिको ने भारत सहित एशियाई देशों पर 50% तक टैरिफ बढ़ाए, इस फैसले का प्रभाव क्या होगा जानते हैे.

Share

नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से खुद भारी टैरिफ झेल रहा मेक्सिको अब उन्हीं नीतियों की तरह भारत, चीन, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों पर भी बड़ा शुल्क लगाने जा रहा है. मेक्सिको की सीनेट ने 2026 से लागू होने वाली नई टैरिफ व्यवस्था को मंजूरी दे दी है. इस नए ढांचे में कई उत्पादों पर अधिकतम 50% तक आयात शुल्क लगाया जाएगा, जबकि ज्यादातर उत्पादों पर शुल्क 35% के आसपास रहेगा.

मेक्सिको टैरिफ क्यों बढ़ा रहा है?

घरेलू उद्योग की सुरक्षा
राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम की सरकार का कहना है कि एशियाई देशों से अत्यधिक आयात के कारण उसके ऑटो, टेक्सटाइल, स्टील, प्लास्टिक, फुटवियर और कई उपभोक्ता क्षेत्रों पर दबाव बढ़ गया है. सरकार का तर्क है कि ऊंचे टैरिफ लगाकर घरेलू उद्योग और नौकरियों को बचाया जा सकता है.

राजस्व बढ़ाने की कोशिश
विश्लेषकों का अनुमान है कि इन टैरिफ से 2026 में मेक्सिको सरकार को लगभग 3.7 अरब डॉलर का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, जो उसकी बजटीय चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा.

अमेरिका को साधने की रणनीति
कई विशेषज्ञ मानते हैं कि मेक्सिको का यह कदम भू-राजनीतिक दबाव से भी जुड़ा है. अमेरिका लगातार लैटिन अमेरिकी देशों से चीन के बढ़ते प्रभाव को सीमित करने का दबाव डाल रहा है. ट्रंप प्रशासन यह भी मानता है कि चीन मेक्सिको का इस्तेमाल कर ट्रांस-शिपमेंट के जरिए अमेरिकी बाजार में सामान भेज रहा है. इसलिए मेक्सिको पर भी पहले से 25% टैरिफ लगाए गए हैं. माना जा रहा है कि मेक्सिको एशियाई आयात महंगा कर अमेरिका को संतुष्ट करना चाहता है ताकि USMCA पुनरीक्षण के दौरान उस पर अमेरिकी दबाव कम रहे.

भारत–मेक्सिको व्यापार संबंध
भारत और मेक्सिको का व्यापार काफी बढ़ा है और यह भारत के पक्ष में बेहद असंतुलित है.

  • भारत हर साल करीब 5.3 अरब डॉलर का निर्यात करता है.
  • भारत के शीर्ष निर्यात में पैसेंजर वाहन, मशीनरी, इलेक्ट्रिकल उपकरण, केमिकल, एल्युमिनियम, स्टील और दवाइयां शामिल हैं.
  • केवल 1 अरब डॉलर के आसपास की कारें भारत से मेक्सिको जाती हैं.

भारतीय निर्यात पर असर

सबसे बड़ा झटका: ऑटो सेक्टर को
मेक्सिको ने कारों पर टैरिफ 20% से बढ़ाकर 50% कर दिया है. इससे भारत से मेक्सिको को होने वाला 1 अरब डॉलर का कार निर्यात बड़े पैमाने पर प्रभावित होगा. वोक्सवैगन, ह्युंडई, मारुति सुज़ुकी, निसान जैसी कंपनियां भारत में बने वाहनों को मेक्सिको भेजती रही हैं.

SIAM (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) ने भारत सरकार से हस्तक्षेप की अपील भी की थी, लेकिन मेक्सिको ने अंततः शुल्क बढ़ा दिया. अन्य उत्पादों पर भी असर स्टील, प्लास्टिक, टेक्सटाइल, एल्युमिनियम जैसे कई भारतीय उत्पाद भी ऊंचे टैरिफ की सूची में हैं, जिससे मेक्सिको के आयातकों की लागत बढ़ेगी और वे दूसरे देशों से खरीदारी की ओर मुड़ सकते हैं.

वैश्विक सप्लाई चेन पर नया झटका

  • टैरिफ बढ़ने से भारतीय कंपनियां नई रणनीतियां बनाएंगी—
  • कार निर्यात को अन्य बाज़ारों की ओर मोड़ा जा सकता है,
  • सरकार के जरिए मेक्सिको से बातचीत की कोशिशें तेज हो सकती हैं,
  • निर्यातक अपने ऑर्डर नए देशों में शिफ्ट कर सकते हैं.

आईटी, फार्मा जैसी सेवाएं और उत्पाद टैरिफ के सीधे दायरे में नहीं हैं, इसलिए इन क्षेत्रों में अवसर बढ़ सकते हैं

मेक्सिको का यह कदम भारत सहित कई एशियाई देशों के लिए चुनौतीपूर्ण है. कार और मध्यवर्ती उत्पाद भेजने वाले भारतीय उद्योगों पर सबसे अधिक असर होगा. आने वाले महीनों में नई व्यापार रणनीतियाँ, कूटनीतिक बातचीत और वैश्विक आर्थिक माहौल यह तय करेगा कि यह झटका कितना बड़ा साबित होगा.

Read more

Local News