मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) में इमरजेंसी चिकित्सा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, खेलते समय घायल हुए तीन साल के बच्चे को अस्पताल लाने के बाद परिजनों को ईएनटी (ENT) विभाग के डॉक्टर का इंतजार करना पड़ा। आरोप है कि ड्यूटी पर चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चे को दूसरे डॉक्टर से मोबाइल पर मिली सलाह के आधार पर प्राथमिक उपचार दिया गया।
घटना ने अस्पताल की इमरजेंसी सेवा और ड्यूटी के दौरान डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, मामले में अस्पताल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
खेलते समय घायल हुआ तीन साल का बच्चा
जानकारी के अनुसार, गायघाट थाना क्षेत्र के कमरथू गांव निवासी संतोष कुमार का तीन वर्षीय बेटा शिवांस खेलते समय कांच के गिलास पर गिर गया था। इस घटना में उसकी नाक पर चोट आई।
परिजन बच्चे को पहले स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां से उसे बेहतर इलाज के लिए SKMCH रेफर कर दिया गया। इसके बाद परिजन घायल बच्चे को लेकर अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे।
इमरजेंसी में डॉक्टर का इंतजार करने का आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, इमरजेंसी में पर्चा कटवाने के बाद भी परिजनों को ईएनटी विभाग के डॉक्टर के लिए करीब आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ा। उस समय ड्यूटी पर तैनात बताए गए सीनियर रेजिडेंट डॉ. अकबर जमां और जूनियर रेजिडेंट डॉ. इमाम अंसारी की अनुपस्थिति का आरोप लगाया गया है।
परिजनों के लिए घायल बच्चे को तत्काल उपचार दिलाना प्राथमिकता थी। ऐसे में डॉक्टर की उपलब्धता में कथित देरी ने अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
WhatsApp पर तस्वीर भेजकर ली गई चिकित्सकीय सलाह
रिपोर्ट में बताया गया है कि अस्पताल के कंट्रोल रूम से शुरुआत में ड्यूटी पर डॉक्टर मौजूद होने की जानकारी दी गई। बाद में चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने की बात स्वीकार किए जाने का दावा किया गया है।
इसी दौरान वहां मौजूद एक युवक ने मदद के लिए पहल की। उसने बच्चे के घाव और संबंधित कागजात की तस्वीर WhatsApp के माध्यम से दूसरे डॉक्टर को भेजी। इसके बाद मोबाइल पर मिले निर्देशों के आधार पर ड्रेसिंग कक्ष में बच्चे का प्राथमिक उपचार किया गया।
यह पूरा घटनाक्रम अस्पताल में डॉक्टरों की उपलब्धता और इमरजेंसी में मरीजों को समय पर उपचार मिलने की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। हालांकि, उपचार की पूरी प्रक्रिया और संबंधित चिकित्सकों की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
12 अक्टूबर के निरीक्षण का भी किया गया उल्लेख
रिपोर्ट के मुताबिक, SKMCH के अधीक्षक डॉ. महेश प्रसाद ने 12 अक्टूबर को इमरजेंसी वार्ड का औचक निरीक्षण किया था। उस दौरान ईएनटी विभाग की सीनियर रेजिडेंट डॉ. दिव्या भारती समेत कुछ चिकित्सकों के ड्यूटी पर अनुपस्थित मिलने की बात कही गई है।
बताया गया है कि ईएनटी और नेत्र विभाग के डॉक्टरों की इमरजेंसी ड्यूटी से अनुपस्थिति को लेकर पहले भी शिकायतें मिली थीं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित मामले में एक दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया गया था।
यदि ड्यूटी के दौरान डॉक्टरों की अनुपस्थिति की पुष्टि होती है, तो अस्पताल प्रशासन के लिए जवाबदेही तय करना और आपातकालीन सेवाओं को सुचारु रखना महत्वपूर्ण होगा।
अस्पताल प्रशासन के जवाब का इंतजार
इस मामले में संबंधित डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है। साथ ही यह स्पष्ट होना चाहिए कि घटना के समय ड्यूटी रोस्टर क्या था, चिकित्सकों की अनुपस्थिति की जांच हुई या नहीं और बच्चे को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए गए।
इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता मिलना आवश्यक है। इस घटना के आरोपों की निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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