झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष में अपने बजट का लगभग 76% खर्च किया। महिला एवं बाल विकास विभाग ने ‘मंइयां सम्मान योजना’ की बदौलत 84.98% राशि खर्च कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। नगर विकास एवं कार्मिक विभाग ने 100% बजट उपयोग किया।
रांची। वित्तीय वर्ष के समापन पर झारखंड के तमाम विभाग मिलकर लगभग 76 प्रतिशत राशि खर्च करने में सफल रहे हैं। सबसे बड़ी उपलब्धि मंइयां सम्मान योजना के तहत प्राप्त हुई है और इसी की बदौलत महिला एवं बाल विकास विभाग 84.98 प्रतिशत बजट राशि को खर्च कर सका है।
इस विभाग के अधीन राज्य की सबसे बड़ी मंइयां योजना थी। 23865 करोड़ रुपये के बजट में से महिला एवं बाल विकास विभाग ने 20281.78 करोड़ रुपये खर्च करने में सफलता पाई है। खर्च के आकलन से स्पष्ट होता है कि जिन विभागों में कर्मियों की कमी है वे राशि व्यय करने में पीछे रह गए हैं।
स्पष्ट है कि इन विभागों में बजट के हिसाब से राशि खर्च करने में सरकारी कर्मियों की कमी सबसे बड़ी अड़चन साबित हुई है। विभाग में बजट आवंटन के बावजूद बड़े पैमाने पर राशि खर्च नहीं हो सकी है। राज्य में नगर विकास एवं आवास विभाग के साथ-साथ कार्मिक विभाग को शत-प्रतिशत बजट खर्च करने में सफलता मिली है।
44 में से 12 विभागों का उम्दा प्रदर्शन, खर्च किए 90 प्रतिशत से अधिक
राज्य में आवंटित बजट के हिसाब से कुल 44 विभागों में से 12 ही विभाग ऐसे निकले हैं जिन्होंने आवंटित राशि में से 90 फीसद से अधिक राशि खर्च करने में सफलता पाई है। इन विभागों में कृषि विभाग, इसी विभाग के अंतर्गत कार्यरत दुग्ध उत्पादन विभाग, ऊर्जा विभाग, वन एवं पर्यावरण विभाग, उच्च ए्वं तकनीकी शिक्षा विभाग, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग, श्रम,रोजगार, प्रशिक्षण व कौशल विकास विभाग, सड़क निर्माण विभाग और जल संसाधन विभाग।
खर्च नहीं कर पाने के कारण 30 हजार करोड़ हुए सरेंडर
झारखंड के कुल 44 विभागाें के बीच बजट राशि के व्यय का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इनमें से कई विभागों ने आवंटित राशि के लिहाज से महज 25 से 50 प्रतिशत तक राशि ही व्यय की। ग्रामीण विकास विभाग बड़े बजट के बावजूद 40 फीसद राशि भी खर्च नहीं कर सका। कुल मिलाकर लगभग 30 हजार करोड़ रुपये सरेंडर हुए।
90 प्रतिशत से अधिक व्यय करनेवाले प्रमुख विभाग
| विभाग का नाम | कुल व्यय | प्रतिशत (%) |
|---|---|---|
| कृषि, पशुपालन और सहकारिता विभाग | 758.04 | 99.98% |
| कृषि के अधीन दुग्ध विभाग | 247.11 | 95.43% |
| ऊर्जा विभाग | 9659.32 | 98.56% |
| वन एवं पर्यावरण विभाग | 1441.61 | 90.14% |
| उच्च शिक्षा विभाग | 487.11 | 95.25% |
| उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग | 236.99 | 96.94% |
| गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग | 651.15 | 93.55% |
| श्रम, रोजगार, प्रशिक्षण व कौशल विकास | 874.18 | 94.81% |
| कार्मिक विभाग | 6.10 | 100.00% |
| सड़क निर्माण विभाग | 4562.61 | 95.70% |
| नगर विकास एवं आवास विभाग | 100 | 100.00% |
| जल संसाधन विभाग | 1528.04 | 97.53% |
| कुल (सभी 44 विभाग) | 72183.65 | 75.97% |


