Tuesday, August 18, 2026

महिलाओं की बढ़ी भागीदारी, बैंकिंग और इंटरनेट इस्तेमाल में भी आया बड़ा बदलाव; NFHS-6 में सामने आई तस्वीर.

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नई दिल्ली: भारत में महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल रहा है। परिवार से जुड़े निर्णयों में भागीदारी के साथ-साथ बैंकिंग, रोजगार, मोबाइल और इंटरनेट के इस्तेमाल तथा संपत्ति के स्वामित्व जैसे क्षेत्रों में भी महिलाओं की मौजूदगी बढ़ी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के आंकड़े इस बदलाव के कई पहलुओं को सामने रखते हैं।

NFHS-6 के लिए 2023-24 के दौरान देश के 715 जिलों में करीब 6.79 लाख परिवारों से जानकारी जुटाई गई। मई 2026 में जारी किए गए इस सर्वे के आंकड़ों की तुलना NFHS-5 से करने पर महिलाओं की स्थिति में कई क्षेत्रों में सुधार दिखाई देता है।

परिवार के अहम फैसलों में बढ़ी भूमिका

सर्वे के मुताबिक लगभग 89% विवाहित महिलाएं परिवार से जुड़े कम से कम तीन प्रमुख निर्णयों में शामिल होती हैं। NFHS-5 में यह आंकड़ा 88.7% था।

हालांकि, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच कुछ अंतर अभी भी मौजूद है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी शहरी क्षेत्रों की तुलना में अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई।

बैंकिंग में महिलाओं की बढ़ती आत्मनिर्भरता

वित्तीय भागीदारी के मोर्चे पर भी महिलाओं की स्थिति मजबूत हुई है। NFHS-6 के अनुसार करीब 89% महिलाएं अपने बैंक खाते को खुद संचालित करती हैं। पिछले सर्वेक्षण में यह अनुपात 78.6% था।

रोजगार से जुड़ा आंकड़ा भी बढ़ा है। सर्वे से पहले के 12 महीनों में किसी काम या रोजगार में शामिल रहने वाली महिलाओं का अनुपात 30.8% दर्ज किया गया, जबकि NFHS-5 में यह 25.4% था।

मोबाइल और इंटरनेट तक पहुंच में तेजी

डिजिटल क्षेत्र में महिलाओं की पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। नए सर्वे के अनुसार 63.6% महिलाओं के पास निजी मोबाइल फोन है और वे उसका इस्तेमाल स्वयं करती हैं। NFHS-5 में यह आंकड़ा 53.9% था।

इंटरनेट के इस्तेमाल में भी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। NFHS-6 के मुताबिक लगभग 64.3% महिलाएं इंटरनेट का उपयोग करती हैं, जबकि पिछले सर्वेक्षण में यह हिस्सेदारी 33.3% थी।

इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों की उपलब्धता महिलाओं को ऑनलाइन बैंकिंग, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, रोजगार और सूचना तक पहुंच बनाने में मदद कर सकती है।

संपत्ति के स्वामित्व में भी बढ़ोतरी

महिलाओं की आर्थिक स्थिति को समझने में संपत्ति का स्वामित्व भी अहम संकेतक है। NFHS-6 के आंकड़ों के अनुसार लगभग 18.8% परिवारों में महिलाओं के नाम पर या संयुक्त रूप से घर अथवा जमीन दर्ज है। NFHS-5 में यह अनुपात करीब 14% था।

हालांकि, संपत्ति के स्वामित्व की स्थिति अलग-अलग राज्यों और सामाजिक समूहों में अलग हो सकती है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों के साथ क्षेत्रीय अंतर को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

इस बार सर्वे में कई नए पहलू शामिल

NFHS-6 में महिलाओं की वित्तीय और डिजिटल भागीदारी से जुड़े कुछ अतिरिक्त पहलुओं पर भी जानकारी जुटाई गई। इनमें डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT), स्वयं सहायता समूहों, डिजिटल साक्षरता और बैंकिंग लेन-देन जैसे विषय शामिल हैं।

सर्वे के दौरान ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से अलग-अलग आंकड़े एकत्र किए गए। केंद्र सरकार की ओर से इस राष्ट्रीय सर्वेक्षण के लिए इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज (IIPS), मुंबई को अधिकृत एजेंसी बनाया गया था।

आंकड़े क्या बताते हैं?

परिवार के निर्णयों में भागीदारी, बैंक खाते के स्वतंत्र इस्तेमाल, रोजगार, इंटरनेट और मोबाइल की पहुंच तथा संपत्ति के स्वामित्व में बढ़ोतरी महिलाओं की बदलती सामाजिक-आर्थिक भूमिका को दर्शाती है।

हालांकि, महिलाओं को समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा, रोजगार, वित्तीय सेवाओं, डिजिटल संसाधनों और संपत्ति अधिकारों तक उनकी पहुंच को और व्यापक बनाना महत्वपूर्ण रहेगा। क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना भी इस दिशा में बड़ी चुनौती है।

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