रांची: मशहूर फिल्म निर्देशक अनुभव सिन्हा इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ’80’ के प्रमोशन को लेकर देश के विभिन्न राज्यों और शहरों का दौरा कर रहे हैं. इसी क्रम में वे रांची पहुंचे, यहां उन्होंने सिनेमा, समाज और जिंदगी से जुड़े विषयों पर खुलकर अपनी बात रखी. यह मुलाकात न सिर्फ सिनेमा तक सीमित रही, बल्कि विचारों और अनुभवों के आदान-प्रदान का एक सशक्त मंच भी बनी.
अनुभव सिन्हा हिंदी सिनेमा के उन निर्देशकों में गिने जाते हैं, जिन्होंने मुख्यधारा की फिल्मों के जरिए सामाजिक मुद्दों को मजबूती से उठाया हैय ‘तुम बिन’ से अपने निर्देशन की शुरुआत करने वाले सिन्हा ने ‘दस’, ‘रा.वन’ जैसी व्यावसायिक फिल्मों के साथ-साथ ‘मुल्क’, ‘आर्टिकल 15’, ‘थप्पड़’, ‘अनेक’ और ‘भीड़’ जैसी फिल्मों के जरिए समाज के संवेदनशील और जटिल सवालों को पर्दे पर उतारा है. उनकी फिल्मों में संवेदना, सवाल और यथार्थ की स्पष्ट झलक दिखाई देती है
रांची में एक कार्यक्रम के दौरान अनुभव सिन्हा ने युवा फिल्म निर्माताओं के साथ बातचीत की और उनके सवालों के जवाब दिए. उन्होंने फिल्म निर्माण की प्रक्रिया, विषय चयन और सिनेमा की सामाजिक जिम्मेदारी पर अपने विचार साझा किए. बातचीत के दौरान यह साफ नजर आया कि उनके लिए सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि संवाद और बदलाव का जरिया भी है.
पत्रकारों से बातचीत में अनुभव सिन्हा ने अपनी मौजूदा देश-यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग जगहों पर जाकर लोगों से मिलना, उनके लिए सीखने का अवसर होता है. उन्होंने अपनी आगामी फिल्म ’80’ को लेकर भी चर्चा की और बताया कि यह फिल्म एक महत्वपूर्ण विषय को केंद्र में रखती है, जिस पर वे देशभर में संवाद कर रहे हैं. हालांकि उन्होंने फिल्म की कहानी को लेकर ज्यादा खुलासा नहीं किया, लेकिन इतना जरूर कहा कि यह फिल्म दर्शकों को सोचने पर मजबूर करेगी.
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सिनेमा के बदलते स्वरूप, दर्शकों की सोच और कंटेंट ड्रिवन फिल्मों की बढ़ती स्वीकार्यता पर भी अपनी राय रखी. उनका मानना था कि आज का दर्शक पहले से ज्यादा जागरूक है और वह ऐसी फिल्मों को पसंद कर रहा है, जो सवाल उठाती हैं और समाज को आईना दिखाती हैं. इस अवसर पर एक कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति ने रांची के सिनेप्रेमियों और युवा फिल्मकारों को सीधे संवाद का मौका दिया.
जीवन और सिनेमा, दोनों में ईमानदारी सबसे जरूरी है. सच्ची कहानियां ही लंबे समय तक लोगों के दिलों में जगह बनाती हैं: अनुभव सिन्हा, फिल्म निर्देशक
रांची में हुआ यह संवाद सिनेमा और जिंदगी के बीच के रिश्ते को समझने का एक सार्थक अवसर साबित हुआ है, जिसमें अनुभव सिन्हा के विचारों और अनुभवों ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया है.


