बोकारोः चास नगर निगम में होने वाले मेयर चुनाव में विकास थोड़ी देर के लिए छुट्टी पर है और वोट प्रतिशत सुर्खियों में है. झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के ‘बड़े भाई-छोटे भाई’ वाले बयान ने सियासी तापमान बढ़ा दिया. वहीं भाजपा के पूर्व विधायक बिरंची नारायण ने कॉलोनियों का राजनीतिक नक्शा ही खींच दिया.
हमें सपोर्ट कीजिए, हम आपके छोटे भाई हैं- मंत्री इरफान अंसारी
कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार के प्रचार में बोकारो पहुंचे झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि यहां 27 प्रतिशत आदिवासी और 19 प्रतिशत अल्पसंख्यक आबादी है. हम लोग सिर्फ वोट देने के लिए नहीं हैं. जब सांसद और विधायक चुनाव में हम वोट देते हैं तो मेयर चुनाव में भी हमारा बनता है. आप बड़े भाई हैं तो हम छोटे भाई हैं, हमें सपोर्ट कीजिए. मंत्री ने यह बात इतनी सरलता से कही कि शायद उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यह सियासी प्रयोगशाला में ‘रिएक्शन’ दे देगी.
81% वाला समाज कब तक सोता रहेगा- बिरंची नारायण
मेयर पद के लिए 31 उम्मीदवारों की भीड़ में यह बयान सबसे ज्यादा चुभा तो भाजपा खेमे को या यूं कहें कि वोट के ध्रुवीकरण को अपने पक्ष में करने का जुगत लगाया. मानो बाकी 30 उम्मीदवारों ने इसे मौसम की खबर समझकर छोड़ दिया हो. भाजपा समर्थित प्रत्याशी के लिए खुलकर प्रचार कर रहे पूर्व बोकारो विधायक बिरंची नारायण ने तुरंत विश्लेषण पेश कर दिया. उन्होंने कहा कि 81% वाला समाज कब तक सोता रहेगा. अगर आप भगवती कॉलोनी जाना चाहते हैं मेयर से मिलने तो हमारे समर्थित उम्मीदवार को चुनिए और अगर भर्रा जाना चाहते है तो उनके. अब यह बयान व्यंग्यात्मक है या कुछ और, इस पर जनता कंफ्यूज है.
चास हमेशा से शांतिप्रिय रहा है- जनता
हालांकि चास की जनता इस बयानबाजी को गंभीर कम और मनोरंजन के अंदाज में ज्यादा ले रही है. गली-मोहल्लों में फिलहाल न तो ‘बड़े भाई-छोटे भाई’ की बहस है, न कॉलोनियों का सीमांकन. लोगों का कहना है कि चास हमेशा से शांतिप्रिय रहा है, यहां सियासी बीज बोना इतना आसान नहीं है.
भाजपा का यह कार्ड कहीं उल्टा न पड़ जाये- मतदाता
कुछ मतदाताओं का मानना है कि भाजपा का यह “कार्ड” कहीं उसको ही उल्टा न पड़ जाये. राजनीति के जानकार कह रहे हैं कि अगर ध्रुवीकरण की कोशिश हुई तो वोट इधर-उधर बंटने के बजाय सबसे मजबूत प्रत्याशी की झोली में जा सकता है और फिलहाल भाजपा समर्थित उम्मीदवार उस “सबसे मजबूत” की कुर्सी पर बैठे नजर नहीं आ रहे हैं. उनकी झोली में वोट डालना रिस्क है.
अब असली सवाल यही है कि भाजपा द्वारा छोड़े गए इस सियासी तीर का सबसे ज्यादा फायेदा किसको मिलेगा? निवर्तमान मेयर भोलू पासवान, गोपाल मुरारका, विकास पांडेय, परिंदा सिंह, उमेश कुमार या फिर कोई और, यह तो 23 तारीख को जनता तय करेगी.


