पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाओं के बीच, भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं. सरकार ने वैकल्पिक मार्गों और नए अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से तरल पेट्रोलियम गैस और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की अतिरिक्त आपूर्ति सुरक्षित कर ली है.
वैकल्पिक मार्गों से आएगी खेप
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जैसे संवेदनशील जलडमरूमध्य से बचने के लिए आपूर्ति के वैकल्पिक रास्तों का चयन किया गया है. अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, नॉर्वे और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों से आने वाली ये खेप जल्द ही भारतीय तटों पर पहुंचने की उम्मीद है.
घरेलू उत्पादन में भारी उछाल
ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सरकार ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की तेल कंपनियों को घरेलू उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए थे. इसके परिणामस्वरूप, भारतीय रिफाइनरों ने LPG के घरेलू उत्पादन में 10 प्रतिशत की वृद्धि की है.
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने घोषणा की है कि वह अपने जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में कुकिंग गैस का उत्पादन अधिकतम कर रही है. कंपनी के अनुसार, जामनगर हब में टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो. इसके साथ ही, केजी-डी6 (KG-D6) बेसिन से निकलने वाली प्राकृतिक गैस को भी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में डायवर्ट किया जा रहा है.
प्राथमिकता के आधार पर गैस वितरण
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि देश में गैस की आपूर्ति स्थिर है. सरकार ने गैस वितरण के लिए एक स्पष्ट प्राथमिकता सूची तैयार की है:
- घरेलू उपभोक्ता: पीएनजी और एलपीजी के घरेलू उपभोक्ताओं को 100% आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है.
- सार्वजनिक परिवहन: शहर के परिवहन के लिए सीएनजी की निर्बाध आपूर्ति जारी है.
- आवश्यक संस्थान: अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है.
- औद्योगिक क्षेत्र: चुनौतियों के बावजूद उद्योगों को उनकी जरूरत का लगभग 70-80 प्रतिशत हिस्सा मिल रहा है.
जमाखोरी रोकने के उपायबाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए सरकार ने अनिवार्य इंटर-बुकिंग अवधि को बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है, ताकि सिलेंडर की जमाखोरी रोकी जा सके. केंद्रीय मंत्री पुरी ने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल पश्चिम एशिया पर निर्भर नहीं है, बल्कि अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए वैश्विक स्तर पर स्रोतों का विविधीकरण कर चुका है.


