Monday, April 27, 2026

भारत और न्यूजीलैंड आज ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे, जिससे निर्यात शुल्क मुक्त होगा, 20 अरब डॉलर निवेश आएगा और वीजा आसान होंगे.

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भारत और न्यूजीलैंड ने सोमवार को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर अपने आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ दिया है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के उनके समकक्ष टॉड मैक्ले की मौजूदगी में इस समझौते पर मुहर लगाई गई.

निर्यातकों के लिए बड़ी राहत
इस समझौते की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि न्यूजीलैंड अब भारत से होने वाले 100 प्रतिशत निर्यात पर टैरिफ (सीमा शुल्क) हटा देगा. अब तक न्यूजीलैंड भारत के लगभग 450 उत्पादों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाता था, जिनमें कपड़ा, परिधान, चमड़े के उत्पाद, जूते, कालीन और ऑटोमोबाइल पुर्जे शामिल थे. अब ये सभी उत्पाद बिना किसी शुल्क के न्यूजीलैंड के बाजार में प्रवेश कर सकेंगे, जिससे भारतीय निर्यातकों को जबरदस्त प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा.

दूसरी ओर, भारत ने भी न्यूजीलैंड से होने वाले 95 प्रतिशत आयात पर टैरिफ कम करने या हटाने पर सहमति जताई है. हालांकि, भारतीय किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए डेयरी उत्पादों (दूध, पनीर, दही आदि) और कई कृषि उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा गया है.

20 अरब डॉलर का निवेश और रोजगार
समझौते के तहत न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है. यह निवेश मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे और विनिर्माण क्षेत्रों में किया जाएगा. विशेष रूप से उत्तर प्रदेश का आगरा शहर इस समझौते से बड़ा लाभान्वित होगा. आगरा, जो भारत के 75 प्रतिशत चमड़े के जूतों का उत्पादन करता है, अब न्यूजीलैंड के उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे चमड़े का उपयोग कर वैश्विक स्तर पर एक बड़ा सोर्सिंग हब बनेगा.

छात्रों और पेशेवरों के लिए नए अवसर
इस FTA में पहली बार छात्र गतिशीलता और पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा पर एक विशेष एनेक्स शामिल किया गया है. इसके तहत:

भारतीय छात्र न्यूजीलैंड में पढ़ाई के दौरान हर हफ्ते 20 घंटे काम कर सकेंगे.

  • आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और निर्माण जैसे क्षेत्रों के 5,000 कुशल भारतीयों के लिए सालाना कोटा निर्धारित किया गया है.
  • आयुष चिकित्सक, योग प्रशिक्षक और संगीत शिक्षकों के लिए भी वीजा के विशेष प्रावधान किए गए हैं.
  • ‘वर्किंग हॉलिडे वीजा’ के तहत 1,000 भारतीय युवा हर साल 12 महीने के लिए न्यूजीलैंड जा सकेंगे.

फार्मा और आयुष क्षेत्र को बढ़ावा
भारतीय दवा उद्योग के लिए भी यह समझौता खुशखबरी लेकर आया है. अब भारतीय दवाओं को न्यूजीलैंड में तेजी से नियामक मंजूरी मिलेगी. साथ ही, दोनों देशों ने पहली बार पारंपरिक चिकित्सा (AYUSH) को मान्यता देने वाला एक समर्पित अध्याय शामिल किया है.

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