Monday, March 16, 2026

भारत और अमेरिका के बीच आखिरकार महीनों से चल रहे व्यापार समझौते पर सहमति बन गई है.

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ट्रंप ने भारत को टैरिफ किंग कहा था. लेकिन अब अचानक ही वह पलट गए. जानें विस्तार से.

नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच आखिरकार महीनों से चल रहे व्यापार समझौते पर सहमति बन गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसकी जानकारी दी. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने भारत पर टैरिफ को 18 फीसदी कर दिया है और यह तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है. रूसी तेल खरीदने की वजह से भारत पर 25 फीसदी का जो अतिरिक्त टैरिफ लगा था, ट्रंप ने उसे भी हटाने की जानकारी दी है.

ट्रंप ने लिखा कि भारत, अमेरिका के खिलाफ अपने टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को शून्य तक कम करने की दिशा में आगे बढ़ेगा. यह समझौता इसलिए अहम है, क्योंकि अभी पिछले सप्ताह ही भारत ने यूरोपीय संघ के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की घोषणा की थी. अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ लगाया था. इसमें से 25 फीसदी टैरिफ रूसी तेल खरीदने की वजह से लगाया गया था. अब यह 18 फीसदी हो गया है.

ट्रंप ने यह भी दावा किया है कि भारत ने रूस से तेल नहीं खरीदेगा और वह संभवतः वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमति जताई है. उन्होंने कहा कि इस व्यापारिक समझौते के तहत भारत ने 500 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी ऊर्जा, कृषि, कोयला और अन्य उत्पादों की खरीद पर भी सहमति व्यक्त की है. क्या भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद कर देगा, इसको लेकर प्रधानमंत्री मोदी की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है, जैसा कि ट्रंप ने दावा किया है.

दरअसल, दोनों देशों के बीच पिछले कई महीनों से टैरिफ को लेकर संबंध तनावपूर्ण हो गए थे. तथ्य यह है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीद रहा था, लेकिन वह परंपरागत रूप से रूसी कच्चे तेल का आयातक नहीं रहा है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां ऐसी बनी, कि भारत रूस से अधिक मात्रा में कच्चा तेल खरीदने लगा. यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस के पास तेल की मात्रा अधिक हो गई और उसका निर्यात घट गया. भारत ने इसका फायदा उठाया और कम कीमत पर उसने तेल खरीदना शुरू कर दिया. ट्रंप बार-बार इसकी आड़ में भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ को जस्टिफाई करते रहे.

पिछले साल अक्टूबर महीने में ही ट्रंप ने दावा किया था कि भारत ने रूसी तेल नहीं खरीदने का आश्वासन दिया है. उसी समय अमेरिका ने रूस के सबसे बड़े तेल उत्पादकों, रोसनेफ्ट पीजेएससी और लुकोइल पीजेएससी पर प्रतिबंध लगा दिए, जिससे तेल की मांग में और भी अधिक कमी आई.

काफी खींचतान के बाद भारत और अमेरिका के संबंध पिछले कुछ दिनों में बेहतर हुए हैं और व्यापार को लेकर बैकग्राउंड में कई स्तर पर बातचीत भी हुई. जैसे भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल का आयात बढ़ाना शुरू कर दिया. एलपीजी को लेकर समझौते हुए. सरकारी रिफाइनरी कंपनियों ने अमेरिकी एलपीजी आयात के लिए एक साल का समझौता किया. भारत ने शांति विधेयक (परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास संबंधित) पारित किया, जिसके बाद अमेरिकी निजी कंपनियों को इस क्षेत्र में निवेश करने में आसानी होगी.

50 फीसदी टैरिफ लगाने से पहले ट्रंप ने कहा था कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बहुत जल्द घोषणा करने वाले हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर को लेकर दोनों देशों के बीच जो स्टैंड रहा, उसने व्यापारिक समझौते को प्रभावित किया.

ट्रंप ने कई मौकों पर भारत को “टैरिफ किंग” तक कहा. उन्होंने हार्ले डेविडसन का उदाहरण देकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की थी. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की रिपोर्ट में भारत द्वारा सेब, अखरोट, नेचुरल रबर, कॉफी, किशमिश, मक्का, वनस्पति तेल आदि वस्तुओं पर हाई टैरिफ का जिक्र किया गया. बाद में भारत ने कई अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम किया. मसलन, 1600 सीसी से अधिक इंजन क्षमता वाली मोटरसाइकिलों पर टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी कर दिया गया. बॉर्बन व्हिस्की पर भी शुल्क 150 फीसदी से घटाकर 50 फीसद तक कर दिया. अमेरिका इसका सबसे बड़ा उत्पादक है.

शुरुआत में ऐसा लगा कि ट्रंप जिस तरह से दूसरे देशों पर टैरिफ की घोषणा कर रहे हैं, उसके मुकाबले भारत पर कम टैरिफ लगाया जाएगा. अमेरिका ने 27 फीसदी टैरिफ की भी घोषणा कर दी थी. उसी समय ट्रंप ने चीन पर 54 फीसदी, लाओस पर 48 फीसदी, वियतनाम पर 46 फीसदी, बांग्लादेश पर 37 फीसदी, थाईलैंड पर 36 फीसदी, जापान और कोरिया पर 25-25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी. यूरोपीय संघ पर 20 फीसदी और ब्रिटेन पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने को लेकर बात कही गई. इन देशों के मुकाबले भारत के साथ 27 फीसदी के टैरिफ को बाजार ने स्वीकार कर लिया था.

उस समय विशेषज्ञों को लगा कि भारत अमेरिका के साथ बातचीत करके टैरिफ को कम करवा लेगा और भारत की स्थिति दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर हो जाएगी. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर की वजह से दोनों देशों के बीच तनाव हो गया और टैरिफ पर होने वाली बातचीत अधूरी रह गई. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोकने के लिए दोनों देशों पर टैरिफ का दबाव बनाया. भारत ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

ट्रंप के बार-बार यह दावा करने के बावजूद कि अमेरिकी टैरिफ के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम हुआ, नई दिल्ली का कहना था कि युद्धविराम 10 मई को पाकिस्तान के डीजीएमओ द्वारा भारतीय डीजीएमओ को किए गए फोन कॉल के बाद हुआ था. ट्रंप ने भारत के इस स्टैंड को व्यक्तिगत रूप से लिया और उन्होंने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी, जबकि दूसरे देशों के साथ बेहतर व्यापारिक समझौता किया.

अब अमेरिका को भी इसका अहसास हो चुका है कि वह भारत जैसे देश के साथ बहुत ज्यादा दिनों तक व्यापारिक तनाव नहीं रख सकता है और उसने 18 फीसदी टैरिफ की घोषणा की. एक बार फिर से चीन के बजाए भारत पर फोकस बढ़ेगा, विश्व की दूसरी कंपनियां चीन के बजाए भारत को प्राथमिकता देंगी और भारत मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर सकता है.

इस बदलाव से इस साल भारतीय जीडीपी की वृद्धि दर में लगभग 0.2 से 0.3 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हो सकती है.

एक नजर टाइमलाइन पर

  • 13 फरवरी, 2025: एक संयुक्त बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्यापार संबंधों को और मजबूत करने पर सहमत हुए हैं. दोनों नेताओं ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 191 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर से अधिक करने का एक साहसिक लक्ष्य निर्धारित किया.
  • 4-6 मार्च: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वाशिंगटन डीसी का दौरा किया और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर तथा अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं.
  • 2 अप्रैल, 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 26 प्रतिशत का अतिरिक्त आयात शुल्क (10 प्रतिशत आधार शुल्क और 16 प्रतिशत जवाबी शुल्क) लगाने की घोषणा की.
  • 9 अप्रैल, 2025: अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले 26 प्रतिशत के जवाबी शुल्क को 90 दिनों (नौ जुलाई, 2025 तक) के लिए स्थगित कर दिया.
  • 23-29 अप्रैल, 2025: तत्कालीन भारतीय मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल (अब वाणिज्य सचिव) ने प्रस्तावित व्यापार समझौते के लिए अमेरिकी समकक्षों के साथ पहली व्यक्तिगत बैठक के लिए वाशिंगटन का दौरा किया। उन्होंने शुल्क, गैर-शुल्क बाधाओं और सीमा शुल्क सरलीकरण सहित 19 अध्यायों को कवर करने वाले संदर्भ की शर्तों पर चर्चा की.
  • 17-20 मई, 2025: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वाशिंगटन का दौरा किया और यूएसटीआर ग्रीर और अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक से मुलाकात की.
  • 4-10 जून, 2025: अतिरिक्त अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने सप्ताह भर चलने वाली चर्चाओं के लिए भारत का दौरा किया.
  • 26 जून, 2025: अग्रवाल के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने नौ जुलाई की समयसीमा से पहले मतभेदों को दूर करने के लिए अगले दौर की बातचीत के लिए फिर से वाशिंगटन का दौरा किया.
  • 27 जून, 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ एक बहुत बड़ा व्यापार समझौता करने जा रहा है.
  • 31 जुलाई, 2025: अमेरिका ने सात अगस्त, 2025 से प्रभावी होने वाले 25 प्रतिशत शुल्क की घोषणा की.
  • 6 अगस्त, 2025: ट्रंप ने भारत से आने वाले सामानों पर दंडात्मक कार्रवाई के रूप में अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगा दिया, क्योंकि नई दिल्ली ने रूस से तेल की खरीद जारी रखी थी.
  • 16 सितंबर, 2025: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के कार्यालय के अधिकारियों ने भारत में व्यापार समझौते के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और इस संबंध में प्रयासों को तेज करने का निर्णय लिया गया.
  • 22 सितंबर, 2025: गोयल ने व्यापार वार्ता के लिए न्यूयॉर्क का दौरा किया। उनके साथ राजेश अग्रवाल भी थे.
  • 15-17 अक्टूबर, 2025: भारतीय टीम वार्ता के लिए वाशिंगटन में रही। अब तक औपचारिक रूप से छह दौर की बातचीत हो चुकी थी.
  • 10 दिसंबर, 2025: उप अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) रिक स्विट्जर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अपने भारतीय समकक्ष राजेश अग्रवाल के साथ दो दिवसीय व्यापार वार्ता के लिए राजधानी का दौरा किया.
  • 12 जनवरी, 2026: भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया कि दोनों पक्ष व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं.
  • 2 फरवरी, 2026: भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए जिसके तहत वाशिंगटन भारतीय वस्तुओं पर पारस्परिक शुल्क को मौजूदा 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ फोन पर बातचीत के बाद यह घोषणा की.

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