मुंबई: भारतीय इक्विटी बाजार में गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान सुस्त लेकिन सकारात्मक रुख देखने को मिला. वैश्विक बाजारों, विशेष रूप से अमेरिकी बाजार वॉल स्ट्रीट से मिले बेहतर संकेतों के कारण आईटी (IT) शेयरों में अच्छी रिकवरी दर्ज की गई. सुबह के सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सूचकांक लाल और हरे निशान के बीच झूलते नजर आए.
बाजार के मुख्य आंकड़े (सुबह 9:25 बजे तक)शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 58 अंक या 0.07 प्रतिशत की मामूली तेजी के साथ 82,334 के स्तर पर कारोबार करता दिखा. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 15 अंक या 0.06 प्रतिशत बढ़कर 25,498 के स्तर पर पहुंच गया.
सेक्टोरल प्रदर्शन
आईटी और बैंकिंग में जोशआज के कारोबार में सबसे ज्यादा चमक आईटी इंडेक्स में रही, जिसमें 1.01 प्रतिशत की तेजी देखी गई. कल अमेरिकी बाजार में नैस्डैक (Nasdaq) के 1.26 प्रतिशत चढ़ने का सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ा. इसके अलावा पीएसयू बैंक (PSU Bank) इंडेक्स भी 1.13 प्रतिशत की बढ़त के साथ हरे निशान में रहा. हालांकि, रियल्टी (Realty) और एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर में दबाव दिखा, जहाँ क्रमश: 0.46 और 0.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
मिडकैर और स्मॉलकैप में अंतर
मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में मिला-जुला रुझान रहा. जहाँ निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था, वहीं स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.08 प्रतिशत की मामूली गिरावट देखी गई.
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में सकारात्मक गति और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की लगातार खरीदारी से बाजार को स्थिरता मिल रही है. हालांकि, निफ्टी अभी भी एक सीमित दायरे (Consolidation Band) में कारोबार कर रहा है. तकनीकी नजरिए से निफ्टी के लिए 25,250 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट (सहारा) का काम कर रहा है, जबकि 25,650 के स्तर पर प्रतिरोध (Resistance) देखा जा रहा है. बैंक निफ्टी के लिए 60,700–60,800 पर सपोर्ट और 61,300–61,400 पर रेजिस्टेंस बना हुआ है.
वैश्विक बाजारों का हाल
एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का ‘कोस्पी’ 2.21 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ सबसे आगे रहा, जबकि जापान का निक्केई 0.31 प्रतिशत ऊपर रहा. हालांकि, हांगकांग के हैंगसेंग में 0.43 प्रतिशत की गिरावट देखी गई.
संस्थागत निवेशकों की हलचल
25 फरवरी के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 2,991 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 5,119 करोड़ रुपये की भारी खरीदारी कर बाजार को संभाले रखा


