Wednesday, April 1, 2026

भारतीय शेयर बाजार ने नए वित्त वर्ष (FY27) का आगाज शानदार बढ़त के साथ किया है.

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भारतीय शेयर बाजार ने नए वित्त वर्ष (FY27) का आगाज शानदार बढ़त के साथ किया है. पिछले दो दिनों से जारी गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों ने निवेशकों को बड़ी राहत दी. बाजार में आए इस उछाल के पीछे मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबरें और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत रहे.

बाजार का लेखा-जोखा
कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 1,186.77 अंक (1.65%) की भारी बढ़त के साथ 73,134.34 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 348 अंक (1.56%) चढ़कर 22,679.40 के स्तर पर स्थिर हुआ. हालांकि, बाजार ने दिन के ऊपरी स्तरों से कुछ बढ़त गंवा दी, क्योंकि सत्र के उत्तरार्ध में अमेरिका-ईरान भू-राजनीतिक तनाव को लेकर शुरुआती उत्साह थोड़ा कम होता दिखा.

मिडकैप और स्मॉलकैप में जबरदस्त खरीदारी
दिग्गज शेयरों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कहीं अधिक रौनक देखी गई. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 2.24% की तेजी रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 3.24% की छलांग लगाकर बंद हुआ. यह दर्शाता है कि छोटे और मझोले शेयरों में निवेशकों का भरोसा तेजी से लौटा है.

सेक्टरवार प्रदर्शन
सबसे आगे: बैंकिंग क्षेत्र, विशेषकर PSU बैंक आज के कारोबार के सबसे बड़े हीरो रहे. इसके अलावा केमिकल और मीडिया सेक्टर में भी जबरदस्त लिवाली देखी गई.

टॉप गेनर्स: निफ्टी की कंपनियों में ट्रेंट लिमिटेड (Trent), इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo) और अडाणी पोर्ट्स ने सबसे ज्यादा मुनाफा कमाया.

पिछड़ने वाले सेक्टर: बाजार की इस हरियाली के बावजूद हेल्थकेयर और फार्मा (दवा) सेक्टर दबाव में रहे और गिरावट के साथ बंद हुए.

विशेषज्ञों की राय और तकनीकी नजरिया
बाजार जानकारों के अनुसार, निफ्टी के लिए अब 23,000 का स्तर एक मनोवैज्ञानिक बाधा और कड़ा रेजिस्टेंस (रुकावट) बना हुआ है. यदि बाजार इस स्तर को पार करता है, तो नई तेजी देखने को मिल सकती है. नीचे की ओर, यदि निफ्टी 22,500 के स्तर को बनाए रखने में विफल रहता है, तो यह 22,300 और फिर 21,700 के मजबूत डिमांड जोन तक फिसल सकता है.

निवेशकों की नजर अब अमेरिका से आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर है, जिनमें नॉन-फार्म पेरोल, ADP एम्प्लॉयमेंट और बेरोजगारी दर शामिल हैं. इन आंकड़ों के आने के बाद वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ेगा.

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