Wednesday, January 28, 2026

 भारतीय शेयर बाजारों ने मंगलवार को कमजोरी के साथ कारोबार समाप्त किया.

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 भारतीय शेयर बाजारों ने मंगलवार को कमजोरी के साथ कारोबार समाप्त किया. हाल ही में हुई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे बाजार दबाव में आ गया. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए. इस गिरावट की मुख्य वजह विभिन्न सेक्टर्स में व्यापक स्तर पर हुई बिकवाली रही.

बीएसई सेंसेक्स 297.07 अंक यानी 0.36 प्रतिशत टूटकर 82,029.98 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 81.85 अंक यानी 0.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,145.50 पर बंद हुआ. विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 25,300 से 25,400 का दायरा एक मजबूत प्रतिरोध क्षेत्र बना हुआ है, जबकि 25,000 का स्तर एक अहम समर्थन बना हुआ है. उनका कहना है कि जब तक बाजार इस दायरे को स्पष्ट रूप से पार नहीं करता, तब तक यह सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव करता रहेगा.

बाजार में अधिकांश सेक्टर्स में बिकवाली देखी गई, जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सबसे अधिक प्रभावित हुए. निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 1.52 प्रतिशत गिरा. इसके अलावा, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी मीडिया इंडेक्स में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई.

सेंसेक्स के घटक शेयरों में बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, टाटा स्टील और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) प्रमुख गिरावट वाले शेयर रहे. दूसरी ओर, टेक महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक, पॉवर ग्रिड और हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) जैसे कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिसने बाजार को आंशिक सहारा दिया

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखी गई. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.75 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.89 प्रतिशत टूट गया. विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है, खासकर ग्लोबल संकेतों, कॉरपोरेट नतीजों और डेरिवेटिव्स के रोलओवर के कारण.

इस बीच, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब बंद हुआ. डॉलर की वैश्विक मजबूती और एशियाई मुद्राओं की कमजोरी से रुपये पर दबाव बना रहा. हालांकि, आरबीआई के हस्तक्षेप और विदेशी निवेश की बदौलत रुपये ने पिछले दो हफ्तों में सीमित दायरे में स्थिरता बनाए रखी है.

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