Monday, March 16, 2026

भारतीय रेलवे अब वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के यात्रियों को पारंपरिक सफेद बेडशीट और कंबल की जगह नए और रंगीन चादर-कंबल उपलब्ध करा रहा है…

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भारतीय रेलवे अपनी पहचान को तेजी से बदल रहा है. वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें इस “नए रूप” का सबसे प्रमुख चेहरा हैं. विशेष रूप से, रेलवे वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में यात्रियों के आराम को काफी बेहतर बनाने के लिए नए-नए तरीकों पर प्रयोग कर रहा है. हाल ही में, रेलवे द्वारा वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस में किया गया एक छोटा सा बदलाव सोशल मीडिया पर चर्चा का एक बड़ा विषय बन गया है. खास तौर पर, रेलवे अब यात्रियों को सफेद कंबल के बजाय नई रंगीन चादरें और कंबल दे रहा है. बता दें, पहले यात्रियों को सफेद चादरें और कंबल दिए जाते थे और जिन्हें वे रेल यात्रा का एक अभिन्न अंग मानते थे, अब रंग-बिरंगे और आकर्षक डिजाइनों में उपलब्ध कराए जा रहे हैं.

आमतौर पर, रेलवे AC कोच में सफर करने वाले यात्रियों को कंबल, तकिए और चादरें मुफ्त में देता है. हालांकि, पहले ये चीजें हमेशा सफेद रंग की होती थीं. Instagram यूजर Oindrila Dutta का पोस्ट किया गया एक वीडियो अब इंटरनेट पर वायरल हो रहा है. उन्होंने अपने वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा, ‘अब 3 AC कोच में मुर्दाघर जैसा माहौल नहीं रहा.’ उन्होंने बताया कि सफेद कंबल पूरे कोच को किसी अस्पताल के वार्ड या मुर्दाघर जैसा बना देते थे, लेकिन अब रंग-बिरंगी, काले प्रिंट वाली बैंकेट ने कोच को एक नया और ताजा लुक दे दिया है.

इंटरनेट यूजर्स की प्रतिक्रियाएं, तारीफ और सावधानी
रेलवे की तरफ से की गई इस बदलाव पर इंटरनेट यूजर्स ने मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दी हैं. कुछ लोगों ने टिप्पणी करते हुए कहा कि नई बेडशीट और कंबल बहुत गर्म, आरामदायक और आकर्षक लग रहे हैं, जबकि दूसरों ने एक अहम मुद्दे की ओर ध्यान दिलाया, कि भले ही यह बदलाव हुआ हो, लेकिन जिम्मेदारी की भावना होना बहुत जरूरी है. यूजर्स ने इस बात पर जोर दिया कि लोगों को रेलवे द्वारा दिए गए इन रंग-बिरंगे कंबलों और तकियों को अपने साथ घर नहीं ले जाना चाहिए. एक यूजर ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अगर कोई भी सामान गायब होता है, तो उस खास कोच की देखरेख के लिए तैनात रेलवे कर्मचारियों को अपनी सैलरी से उन चीजों का हर्जाना भरना पड़ेगा.

इस बीच, कुछ यूजर्स ने यह संदेह भी जाहिर किया कि हो सकता है रेलवे की तरफ से इन चीजों को ठीक से धोया न जाए, यूजर ने तर्क दिया कि चूंकि कंबल रंगीन हैं, इसलिए उन पर गंदगी और दाग तुरंत दिखाई नहीं देंगे.

कुछ नेटिजन्स ने बताया कि यह याद रखना जरूरी है कि यह सुविधा सिर्फ वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में ही उपलब्ध है, और इन ट्रेनों के टिकट की कीमतें आम ट्रेनों के मुकाबले काफी ज्यादा होती है.

खाने की सप्लाई में हाई-टेक स्टैंडर्ड
सिर्फ बेड ही नहीं, IRCTC वंदे भारत स्लीपर में खाने की सप्लाई को लेकर भी कड़े नियमों का पालन कर रहा है. हाल ही में वायरल हुए एक और वीडियो में, रेलवे कर्मचारी हेयर नेट, फेस मास्क और ग्लव्स पहनकर बहुत हाइजीनिक तरीके से खाना परोसते हुए दिख रहे हैं. कुल मिलाकर, रेलवे का यह नया ट्रेंड यात्रियों को एक शानदार अनुभव दे रहा है.

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन

इंडियन रेलवे ने लंबी दूरी के सफर में क्रांति ला दी है. भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू होने से यात्रियों को सफर के दौरान हाई स्पीड, बेहतर सेफ्टी और मॉडर्न सुविधाएं मिल रही हैं. आपको बता दें कि 17 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दिखाकर इस हाई स्पीड ट्रेन का उद्घाटन किया था. यह हाई-स्पीड स्लीपर ट्रेन (ट्रेन नंबर 27576) हावड़ा और गुवाहाटी (कामाख्या) के बीच रेगुलर चलेगी. खास बात यह है कि यह ट्रेन राजधानी और दूसरी सुपरफास्ट ट्रेनों से कम समय में दूरी तय करेगी, जिससे यात्रियों को सफर का एक शानदार लेकिन सस्ता ऑप्शन मिलेगा. यह ट्रेन 22 जनवरी को शुरू हुई थी और इसकी बुकिंग 19 जनवरी से ही शुरू हो गई थी. आपको बता दें कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की पहली कमर्शियल यात्रा 22 जनवरी 2026 को कामाख्या स्टेशन से शुरू हुई थी.

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