Saturday, March 28, 2026

भारतीय डाक विभाग ढाई आखर प्रतियोगिता का आयोजन कर रहा है.

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Dhai Aakhar competition

भारतीय डाक विभाग ने मौजूदा डिजिटल युग में एक नया अभियान शुरू किया है. देश में 150 साल से भी ज्यादा पुराना डाक विभाग, लगातार खुद को अपडेट कर रहा है और बदलते समय के हिसाब से सेवाएं दे रहा है. मौजूदा डिजिटल युग में कई बदलाव हुए हैं. नई टेक्नोलॉजी और संसाधन पुरानी चीजों को नई पीढ़ी से दूर कर रहे हैं.

  • लोग ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए अपनी बातों का आदान-प्रदान कर रहे हैं. यही वजह है कि आज की पीढ़ी पोस्टकार्ड, अंतर्देशीय पत्र और लिफाफों के बारे में भूल गई है. डिजिटल युग में कलम का इस्तेमाल भी कम हो रहा है. इसलिए, इंडिया पोस्ट, यानी डाक विभाग ने लोगों को कलम और कागज के करीब लाने के लिए ढाई आखर राष्ट्रीय पत्र लेखन अभियान की एक अनोखी पहल की है

भारतीय डाक विभाग ने अपनी ढाई आखर राष्ट्रीय स्तर की पत्र लेखन प्रतियोगिता की घोषणा की है. इसमें हिस्सा लेने वाले न सिर्फ राष्ट्रीय पहचान हासिल कर सकते हैं, बल्कि 50,000 रुपये तक के नकद इनाम भी जीत सकते हैं. जमशेदपुर हेड पोस्ट ऑफिस के सीनियर पोस्टमास्टर शेखर कुजूर ने ढाई आखर प्रतियोगिता के बारे में पूरी जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रतियोगिता का विषय बहुत खास है – – Letter to My Role Model, हिंदी में- मेरे आदर्श को पत्र.

उन्होंने बताया कि प्रतिभागियों को अपने रोल मॉडल को एक पत्र लिखना होगा. कोई भी भारतीय नागरिक इसमें हिस्सा ले सकता है. इसे दो आयु समूहों में बांटा गया है: 18 साल तक के लोग अंतर्देशीय पत्र कार्ड पर लिखेंगे, और 18 साल से ज्यादा उम्र के लोग सादे कागज पर कलम से लिखेंगे. पत्र हिंदी, अंग्रेजी या किसी भी स्थानीय भाषा में लिखा जा सकता है. A4 साइज के कागज पर शब्दों की सीमा 1000 शब्द और अंतर्देशीय पत्र कार्ड पर 500 शब्द है.

उन्होंने आगे बताया कि पत्र अपने संबंधित राज्य के चीफ पोस्टमास्टर जनरल को संबोधित करके भेजना है और इसे 8 दिसंबर 2025 तक पोस्ट कर देना है. ढाई आखर प्रतियोगिता में राज्य स्तर पर पहला पुरस्कार 25,000 रुपये, दूसरा पुरस्कार 10,000 रुपये और तीसरा पुरस्कार 5,000 रुपये हैं. वहीं नेशनल लेवल पर प्रथम पुरस्कार 50,000 रुपये, द्वितीय पुरस्कार 25,000 रुपये और तृतीय पुरस्कार 10,000 रुपये है.

सीनियर पोस्टमास्टर ने बताया कि इस अभियान के जरिए डाक विभाग का मकसद युवा पीढ़ी को डिजिटल डिटॉक्स करने और लिखने की कला को फिर से अपनाने के लिए बढ़ावा देना है. कलम से लिखने से न सिर्फ मस्तिष्क का विकास होता है, बल्कि पत्र के जरिए अपनी भावनाओं को जाहिर करने का भी बेहतर मौका मिलता है.

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