बोकारो: पर्यावरण संरक्षण और सतत इस्पात उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में सेल के बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) ने एक नई पहल करते हुए अत्याधुनिक ग्रीनहाउस गैस (GHG) डैशबोर्ड की शुरुआत की है। यह डिजिटल सिस्टम संयंत्र की विभिन्न उत्पादन इकाइयों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन की निगरानी, विश्लेषण और प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाएगा।
डैशबोर्ड का उद्घाटन बीएसएल के निदेशक प्रभारी ने किया। इस अवसर पर सेल के पर्यावरण प्रबंधन प्रभाग के अधिशासी निदेशक, संयंत्र के अन्य अधिशासी निदेशक, वरिष्ठ अधिकारी तथा तकनीकी सहयोगी संस्था सेंट्रा वर्ल्ड, बेंगलुरु के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में मुख्य महाप्रबंधक (पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास) ने बताया कि यह प्रणाली संयंत्र की डी-कार्बोनाइजेशन रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ईआरपी/एसएपी आधारित यह डैशबोर्ड सिंटर प्लांट, कोक ओवन, ब्लास्ट फर्नेस, स्टील मेल्टिंग शॉप और रोलिंग मिलों जैसी प्रमुख इकाइयों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की लगभग वास्तविक समय (Near Real-Time) में निगरानी करेगा। इसके जरिए उत्सर्जन के प्रमुख स्रोतों की पहचान कर डेटा आधारित निर्णय लेने में भी सहायता मिलेगी।
इस प्लेटफॉर्म का विकास एम/एस सेंट्रा वर्ल्ड, बेंगलुरु ने बोकारो इस्पात संयंत्र की तकनीकी समिति और सेल के पर्यावरण प्रबंधन प्रभाग, कोलकाता के सहयोग से किया है। इसमें जीएचजी प्रोटोकॉल, वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन की कार्यप्रणाली, कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) और कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों को शामिल किया गया है। यह प्रणाली ईआरपी/एसएपी से प्रतिदिन उत्पादन संबंधी आंकड़े स्वतः प्राप्त कर कार्बन फुटप्रिंट का आकलन करती है।
निदेशक प्रभारी ने कहा कि आधुनिक डिजिटल तकनीकों का उपयोग पर्यावरणीय प्रदर्शन में सुधार और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को हासिल करने में अहम योगदान देगा। उन्होंने इस परियोजना को सफल बनाने में शामिल सभी विभागों और टीमों की सराहना भी की।
बीएसएल के अनुसार, यह नई पहल हरित इस्पात उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ सेल की दीर्घकालिक सतत विकास नीति और भारत के जलवायु लक्ष्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगी।


