Wednesday, September 16, 2026

बिहार में CCA के तहत DM की शक्तियां बढ़ीं, पेपर लीक और भू-माफिया समेत कई अपराधों पर कार्रवाई का प्रावधान.

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गृह विभाग की अधिसूचना के तहत जिलाधिकारियों को निरोधात्मक कार्रवाई के अधिकार; नई अपराध श्रेणियों को CCA के दायरे में शामिल किए जाने का दावा

पटना, 16 सितंबर। बिहार में कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में जिलाधिकारियों को बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (CCA), 2024 के तहत मिली शक्तियों के इस्तेमाल की अवधि बढ़ाई गई है। गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचनाओं के अनुसार, राज्य के सभी जिला दंडाधिकारियों को धारा 12(2) के तहत निर्धारित अवधि के लिए इन शक्तियों का प्रयोग करने का अधिकार दिया जाता रहा है। सितंबर 2025 और मार्च 2026 में भी ऐसी अधिसूचनाएं जारी की गई थीं।

उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने पेपर लीक, अवैध कब्जे, अवैध खनन, मानव तस्करी और अन्य संगठित अपराधों जैसी गतिविधियों को लेकर CCA के तहत निरोधात्मक कार्रवाई का दायरा बढ़ाने की व्यवस्था की है।

CCA के तहत क्या कार्रवाई हो सकती है?

निरोधात्मक कानूनों का उद्देश्य किसी ऐसे व्यक्ति की गतिविधियों को रोकना है, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था या शांति भंग होने का खतरा माना जाए। CCA के तहत सक्षम प्राधिकारी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार निरोधात्मक आदेश जारी कर सकता है।

ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति पर कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं और निर्धारित शर्तों का पालन करने के लिए कहा जा सकता है। कार्रवाई के दौरान लागू कानूनी प्रक्रिया और संबंधित व्यक्ति को उपलब्ध वैधानिक उपाय भी महत्वपूर्ण होंगे।

इन अपराधों को लेकर कार्रवाई का दायरा बढ़ाने की तैयारी

रिपोर्ट के मुताबिक, CCA के तहत कार्रवाई के दायरे में कई ऐसी गतिविधियों को शामिल किया गया है, जिनका संबंध सार्वजनिक व्यवस्था, संगठित अपराध या बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधियों से है। इनमें प्रमुख रूप से—

  • सार्वजनिक या निजी संपत्ति पर अवैध कब्जा या बड़े पैमाने पर नुकसान
  • प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित कदाचार
  • अवैध खनन
  • वन्यजीवों से जुड़े गंभीर अपराध
  • सोशल मीडिया के माध्यम से समुदायों के बीच वैमनस्य या हिंसा भड़काने वाली गतिविधियां
  • मानव तस्करी
  • अवैध रूप से हथियार या विस्फोटक रखने अथवा उनके कारोबार से जुड़े अपराध

शामिल बताए गए हैं।

पेपर लीक से जुड़े मामलों में इसके साथ Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 जैसे विशेष कानून भी लागू हो सकते हैं। बिहार में इस कानून के तहत विशेष अदालतों के गठन से जुड़ी अधिसूचना भी अगस्त 2026 में जारी की गई थी।

जमीन कब्जे और अवैध खनन पर भी नजर

बिहार में जमीन पर अवैध कब्जे और अवैध खनन से जुड़े मामलों को भी कानून-व्यवस्था के नजरिये से गंभीरता से लिया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत ऐसे मामलों में, जहां संबंधित गतिविधियां CCA की निर्धारित श्रेणियों और कानूनी शर्तों के अंतर्गत आती हैं, निरोधात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि, केवल किसी व्यक्ति पर आरोप लगना अपने आप में CCA के तहत निरोध का आधार नहीं माना जा सकता। कार्रवाई संबंधित कानून में निर्धारित शर्तों और प्रक्रिया के अनुसार ही की जानी होती है।

सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर

रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया के माध्यम से जाति, धर्म, भाषा या समुदाय के आधार पर वैमनस्य फैलाने अथवा हिंसा भड़काने वाली गतिविधियों को भी कार्रवाई के दायरे में रखा गया है।

इसका उद्देश्य ऐसी गतिविधियों को रोकना है, जिनसे सार्वजनिक शांति या कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो।

DM की भूमिका क्या होगी?

CCA के तहत जिला दंडाधिकारी को कानून में निर्धारित परिस्थितियों में निरोधात्मक आदेश जारी करने समेत कुछ प्रशासनिक शक्तियां प्राप्त होती हैं। इसके अलावा संबंधित व्यक्ति पर जिले से बाहर रहने, निर्धारित स्थान पर उपस्थित होने या अन्य शर्तों का पालन करने जैसे आदेश कानूनी प्रावधानों के तहत दिए जा सकते हैं।

बिहार गृह विभाग के रिकॉर्ड में CCA की धारा 12(2) के तहत जिलाधिकारियों को शक्तियां देने संबंधी कई अधिसूचनाएं दर्ज हैं। 24 मार्च 2026 की अधिसूचना में भी सभी जिला दंडाधिकारियों को छह महीने के लिए इन शक्तियों का प्रयोग करने की अनुमति दी गई थी।

कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया अहम

CCA के तहत किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई किए जाने पर अधिनियम में निर्धारित प्रक्रिया लागू होती है। इसलिए किसी अपराध में प्राथमिकी दर्ज होना और CCA के तहत निरोधात्मक कार्रवाई होना एक ही बात नहीं है।

सरकार का तर्क कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति से जुड़े संभावित खतरों को रोकने का है, जबकि किसी भी कार्रवाई की वैधता संबंधित कानून और न्यायिक समीक्षा के अधीन रहती है।

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