Friday, April 17, 2026

बिहार में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए इस साल भी ट्रेनिंग अनिवार्य किया गया है.

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बिहार में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए इस साल भी ट्रेनिंग अनिवार्य किया गया है. करीब साढ़े तीन लाख शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा. मई से जिला स्तर पर कार्यक्रम शुरू होगा. इसका मकसद टीचिंग क्वालिटी में सुधार करना है.

 बिहार के सरकारी स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों के लिए इस साल भी प्रशिक्षण लेना जरूरी होगा. शिक्षा विभाग ने करीब साढ़े तीन लाख शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की तैयारी शुरू कर दी है. इसका मकसद शिक्षकों की क्षमता बढ़ाना और पढ़ाई को और बेहतर बनाना है. इस प्रशिक्षण के लिए राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद यानी एससीईआरटी को नया प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने का जिम्मा दिया गया है. यह मॉड्यूल ऐसा होगा जो क्लास की जरूरतों के हिसाब से बनाया जाएगा. इससे शिक्षक बच्चों को और प्रभावी तरीके से पढ़ा सकेंगे.

विभाग ने आदेश में क्या कहा

विभाग ने आदेश में बताया कि यह मॉड्यूल एक हफ्ते के अंदर तैयार कर लिया जाएगा. इसके बाद मई के पहले सप्ताह से प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा. यह प्रशिक्षण पांच दिनों का होगा और जिला स्तर पर आयोजित किया जाएगा.

ट्रेनिंग प्रोग्राम जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान यानी डायट के जरिए चलाया जाएगा. हर जिले में इसका अलग शेड्यूल तय किया जाएगा. साथ ही यह भी ध्यान रखा जाएगा कि किसी एक स्कूल से एक साथ ज्यादा शिक्षक प्रशिक्षण के लिए न जाएं, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो.

शिक्षक जो सीखेंगे, उसे अप्लाई करेंगे

इस मॉड्यूल को तैयार करने में डायट के शिक्षक, विषय विशेषज्ञ और कुछ बाहरी संस्थाओं के विशेषज्ञ भी शामिल होंगे. इसमें सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन की टीम भी सहयोग करेगी.

अधिकारियों का कहना है कि यह प्रशिक्षण सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे व्यवहारिक बनाया जाएगा. यानी शिक्षक जो सीखेंगे, उसे सीधे कक्षा में लागू कर सकेंगे. इससे पढ़ाने का तरीका बेहतर होगा और छात्रों को भी फायदा मिलेगा.

यह पूरी योजना शैक्षणिक सत्र 2026-27 में फेज वाइज तरीके से लागू होगी. पहले चरण में कक्षा 1 और 2 के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसके बाद कक्षा 3 से 5 तक के शिक्षकों को शामिल किया जाएगा.

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