राजद ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सांसद मनोज झा ने एसआईआर पर रोक लगाने की मांग की है साथ ही निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एसआईआर के लिए पर्याप्त समय नहीं है और सभी नागरिकों के पास आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
पटना। मतदाता-सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरुद्ध राजद सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गया है। पार्टी की राष्ट्रीय इकाई के मुख्य प्रवक्ता व सांसद डॉ. मनोज झा ने याचिका दायर कर एसआईआर पर रोक लगाने की मांग की है।
उन्होंने निर्वाचन आयोग और एसआईआर की प्रक्रिया पर प्रश्न खड़े किए हैं। उन्होंने कहा है कि आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में एसआईआर के लिए अभी न तो पर्याप्त समय है और न ही निर्वाचन आयोग द्वारा मांगे गए दस्तावेज सभी नागरिकों के पास उपलब्ध हैं।
जताई आपत्ति
कुछ वैध दस्तावेजों (आधार-कार्ड, राशन-कार्ड, मनरेगा जाब-कार्ड आदि) को इस प्रक्रिया में स्वीकार नहीं करने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई है।
डॉ. मनोज झा ने अपनी 180 पृष्ठों की याचिका में भारत निर्वाचन आयोग के साथ बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) को प्रतिवादी बनाया है। विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर पर प्रश्न खड़ा करते हुए उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से अविलंब न्याय की गुहार लगाई है।
राजनीतिक दलों की नहीं ली गई सहमति
उन्होंने एसआईआर को चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता में हस्तक्षेप बताया है। उन्होंने कहा है कि इसके लिए राजनीतिक दलों की सहमति नहीं ली गई। यह निर्वाचन आयोग का एकतरफा निर्णय है और इसके चलते बिहार के लाखों नागरिकों से मतदान का अधिकार छीन सकता है।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद-32 का हवाला देते हुए उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से अविलंब हस्तक्षेप का आग्रह किया है। बिहार में गरीबी, अशिक्षा और बाढ़ आदि का संदर्भ देते हुए कहा गया है कि गरीब और वंचित वर्ग के पास मान्य दस्तावेज शायद ही उपलब्ध हों।
बिहार से बड़ी संख्या में अप्रवासन भी है। वैसे लोगों के लिए एसआईआर में सम्मिलित होना संभव नहीं होगा। वैसे लोग मताधिकार से वंचित हो सकते हैं, जो उनके संविधान-प्रदत्त अधिकार का उल्लंघन होगा।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) और तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा भी एसआईआर को सर्वाेच्च न्यायालय में चुनौती दी जा चुकी है।
नौ जुलाई को चक्काजाम
इन याचिकाओं में कहा गया है निर्वाचन आयोग का यह निर्णय मनमाना है। एडीआर का कहना है कि चुनाव आयोग की यह नीति संविधान के विरुद्ध है। इससे वे लोग, जो गरीब हैं, जिनके पास दस्तावेज नहीं हैं, मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
बताते चलें कि 24 जून को निर्वाचन आयोग ने बिहार में एसआईआर की घोषणा की थी। उस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए महागठबंधन की ओर से नौ जुलाई को चक्का जाम की घोषणा भी हो चुकी है।


