Tuesday, January 27, 2026

बिहार में बढ़ते साइबर अपराधों और तकनीकी अपराधों की प्रभावी जांच के लिए राज्य सरकार फॉरेंसिक ढांचे को मजबूत करने जा रही है।

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बिहार सरकार साइबर अपराधों की प्रभावी जांच के लिए फॉरेंसिक ढांचे को मजबूत कर रही है। मार्च से पटना और राजगीर स्थित एफएसएल में साइबर फॉरेंसिक यूनिट शुरू होंगी, जिससे डिजिटल साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच में तेजी आएगी। एडीजी पारसनाथ ने बताया कि राज्य में छह नई एफएसएल भी स्थापित की जाएंगी। इससे लंबित मामलों की जांच में गति आएगी। एक नीट छात्रा की मौत के मामले में एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार ह

पटना। बिहार में बढ़ते साइबर अपराधों और तकनीकी अपराधों की प्रभावी जांच के लिए राज्य सरकार फॉरेंसिक ढांचे को मजबूत करने जा रही है। इसी कड़ी में मार्च महीने से पटना और राजगीर स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) में साइबर फॉरेंसिक यूनिट शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। यह जानकारी सीआईडी के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) पारसनाथ ने दी।

एडीजी पारसनाथ ने बताया कि साइबर अपराधों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में डिजिटल साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच के लिए विशेष साइबर फॉरेंसिक यूनिट की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

पटना और राजगीर एफएसएल में यह यूनिट शुरू होने से मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, सोशल मीडिया, ई-मेल और अन्य डिजिटल माध्यमों से जुड़े अपराधों की जांच में तेजी आएगी। इससे पुलिस और जांच एजेंसियों को तकनीकी मामलों में ठोस साक्ष्य जुटाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि केवल पटना और राजगीर ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी एफएसएल नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।

इस साल गयाजी, बेतिया, मुंगेर, सहरसा, पूर्णिया और छपरा में छह नई फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

इन नए एफएसएल के शुरू होने से जिलों में लंबित मामलों की जांच तेज होगी और रिपोर्ट आने में लगने वाला समय भी कम होगा।

इसी दौरान पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित एक गर्ल्स हॉस्टल में नीट छात्रा की मौत के मामले पर पूछे गए सवाल के जवाब में एडीजी पारसनाथ ने बताया कि एफएसएल की टीम घटनास्थल पर जाकर जांच कर चुकी है।

उन्होंने कहा कि इस मामले में फॉरेंसिक जांच बेहद अहम है और चार से पांच दिनों के भीतर एफएसएल की रिपोर्ट आने का अनुमान है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

एडीजी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील मामले की निगरानी खुद कमजोर वर्ग के एडीजी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं, ताकि जांच में किसी तरह की लापरवाही न हो।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि पुलिस और फॉरेंसिक एजेंसियां पूरी गंभीरता से मामले की जांच कर रही हैं और सच्चाई सामने लाई जाएगी।

राज्य में एफएसएल और साइबर फॉरेंसिक यूनिट के विस्तार को कानून-व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

इससे न सिर्फ साइबर अपराधों पर लगाम लगेगी, बल्कि गंभीर मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर त्वरित न्याय सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।

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