Bihar News: बिहार में कोसी नदी पर निर्माणाधीन एक बड़ा महासेतु जल्द ही देश के सबसे लंबे नदी पुल का रिकॉर्ड अपने नाम कर सकता है। सुपौल के बकौर से मधुबनी के भेजा के बीच बन रहे इस पुल की लंबाई करीब 10.2 किलोमीटर है। परियोजना पूरी होने के बाद यह असम के 9.15 किलोमीटर लंबे भूपेन हजारिका सेतु से अधिक लंबा होगा।
महासेतु के शुरू होने से मिथिला, कोसी और सीमांचल के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय आवागमन के साथ धार्मिक पर्यटन और दूसरे क्षेत्रों तक पहुंच को भी बढ़ावा मिल सकता है।
उच्चैठ और उग्रतारा को जोड़ने की योजना
कोसी महासेतु को केवल यातायात सुविधा के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके जरिए मधुबनी के उच्चैठ भगवती स्थान और सहरसा के महिषी स्थित उग्रतारा स्थान के बीच संपर्क आसान बनाने की योजना है।
पुल चालू होने के बाद इन धार्मिक स्थलों तक आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को पहले की तुलना में सुविधाजनक मार्ग मिल सकता है। इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी गति मिलने की संभावना है।
नेपाल और पूर्वोत्तर से संपर्क में भी मदद
नए महासेतु से मधुबनी की तरफ से कोसी और सीमांचल के विभिन्न इलाकों तक पहुंच आसान होगी। परियोजना को नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की ओर जाने वाले मार्गों के साथ बेहतर कनेक्टिविटी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा पूर्वोत्तर राज्यों की तरफ जाने वाले सड़क नेटवर्क को भी इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।
भारतमाला परियोजना का हिस्सा है महासेतु
बकौर-भेजा महासेतु का निर्माण भारत माला परियोजना के पांचवें चरण के तहत कराया जा रहा है। यह मार्ग NH-527A का हिस्सा है।
कोसी नदी के कारण लंबे समय से प्रभावित क्षेत्रीय आवागमन को इस परियोजना से वैकल्पिक और सीधा सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है।
करीब 1,200 करोड़ रुपये की परियोजना
महासेतु समेत पूरी परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1,199.58 करोड़ रुपये बताई गई है। इसमें लगभग 1,101.99 करोड़ रुपये सिविल निर्माण कार्य के लिए निर्धारित हैं।
पुल का अधिकांश काम पूरा होने की जानकारी है, जबकि कुछ निर्माण कार्य अभी बाकी हैं। परियोजना को पहले अगस्त 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।
बाढ़ और कोरोना के कारण प्रभावित हुआ काम
कोसी नदी में आने वाली बाढ़ के चलते निर्माण कार्य कई बार प्रभावित हुआ। इसके अलावा तकनीकी अड़चनों और कोरोना महामारी के दौरान काम की गति धीमी होने से परियोजना की समयसीमा आगे बढ़ती रही।
अब शेष कार्य को पूरा करने पर जोर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अगले साल तक महासेतु पर वाहनों का परिचालन शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
मिथिला-कोसी-सीमांचल के लिए महत्वपूर्ण कड़ी
महासेतु के चालू होने के बाद बिहार के इन क्षेत्रों के बीच सड़क दूरी और यात्रा समय में कमी आने की उम्मीद है। इससे स्थानीय लोगों के साथ व्यापार, पर्यटन और दैनिक आवागमन को भी फायदा मिल सकता है।
10.2 किलोमीटर लंबा यह पुल पूरा होने के बाद देश के सबसे लंबे नदी पुल के रूप में नया रिकॉर्ड बनाने की स्थिति में होगा।
BHARATSUPERFASTNEWS
