पटना: बिहार सरकार ने अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक सहायता बढ़ाने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को घोषणा की कि यदि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला अंतरजातीय विवाह करती है, तो पात्र मामले में राज्य सरकार की ओर से 2.5 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।
सरकार के इस फैसले को सामाजिक समरसता और जातिगत भेदभाव को कम करने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार का कहना है कि आर्थिक सहयोग के जरिए ऐसे दंपतियों को शादी के बाद शुरुआती दौर में सहायता मिल सकेगी।
पहले कितनी मिलती थी सहायता?
बताया गया है कि बिहार में अंतरजातीय विवाह के लिए पहले राज्य सरकार की ओर से 1 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान था। इसके अलावा केंद्र स्तर पर भी अलग से आर्थिक सहायता की व्यवस्था बताई गई है।
अब राज्य सरकार ने SC-ST वर्ग की महिला के अंतरजातीय विवाह के मामले में अपनी सहायता राशि बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये करने की घोषणा की है। हालांकि, नई व्यवस्था के तहत पात्रता और भुगतान से जुड़े विस्तृत नियम अभी सामने आना बाकी हैं।
महिलाओं की आर्थिक भागीदारी पर भी जोर
मुख्यमंत्री की यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दे रही है। सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए महिलाओं को आय के साधनों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
अंतरजातीय विवाह के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने को भी सामाजिक बराबरी और जातिगत भेदभाव कम करने के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है।
आवेदन कैसे होगा? अभी स्पष्ट नहीं
घोषणा के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि 2.5 लाख रुपये की सहायता पाने के लिए आवेदकों को किन शर्तों को पूरा करना होगा। आवेदन की प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज, समयसीमा और भुगतान का तरीका अभी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है।
सरकार की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश या अधिसूचना जारी होने के बाद ही योजना की पूरी प्रक्रिया सामने आएगी। इसलिए फिलहाल इसे सहायता राशि बढ़ाने की घोषणा के रूप में देखा जाना चाहिए।
सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने की कोशिश
सरकार की ओर से अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन देने का उद्देश्य अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच समानता और सामाजिक मेल-जोल को बढ़ावा देना है। आर्थिक सहायता के जरिए ऐसे विवाह करने वाले पात्र दंपतियों को सहयोग देने की कोशिश की जा रही है।
अब सरकार की विस्तृत गाइडलाइन का इंतजार है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि 2.5 लाख रुपये की सहायता किन पात्र दंपतियों को और किस प्रक्रिया के तहत मिलेगी।
