पटना: बिहार में बाढ़ और सूखे की स्थिति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राजद नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने केंद्र और राज्य सरकार से प्रभावित लोगों के लिए राहत एवं सहायता को लेकर कई सवाल किए हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक बिहार में बाढ़ से 45 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
तेजस्वी यादव का कहना है कि इतनी बड़ी आबादी के प्रभावित होने के बावजूद राहत व्यवस्था को लेकर सरकार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने केंद्र से बिहार के लिए विशेष आर्थिक सहायता की भी मांग की है।
राहत शिविर और सामुदायिक रसोई पर सवाल
तेजस्वी ने दावा किया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में राहत शिविर नहीं हैं। उन्होंने सामुदायिक रसोई को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों तक भोजन और दूसरी जरूरी सुविधाएं पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उनका कहना है कि आपदा की स्थिति में उपलब्ध सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल सीधे प्रभावित लोगों की सहायता के लिए किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर खर्च को लेकर निशाना
तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर बिहार में हुए आयोजनों और कथित खर्च को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि बाढ़ के बीच ऐसे आयोजनों पर बड़ी राशि खर्च की गई।
हालांकि, इस संबंध में सामने आए आंकड़ों और खर्च के दावों को अलग-अलग राजनीतिक पक्षों की बातों के रूप में देखा जाना चाहिए।
आपदा फंड के इस्तेमाल पर मांगा हिसाब
तेजस्वी ने आपदा प्रबंधन के लिए निर्धारित धनराशि को लेकर भी सरकार से जानकारी मांगी। उन्होंने सवाल किया कि आपदा के लिए उपलब्ध फंड में कितनी राशि थी, अब तक कितना खर्च हुआ और प्रभावित परिवारों के लिए कितनी राशि उपलब्ध है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आपातकालीन संसाधनों का इस्तेमाल अन्य मदों में किया गया। इन आरोपों पर सरकार की ओर से आधिकारिक विस्तृत जवाब का उल्लेख जरूरी है।
बिहार को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग
बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच तेजस्वी यादव पहले भी इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने केंद्र से राज्य के लिए विशेष पैकेज देने की मांग भी उठाई है।
उनका तर्क है कि बड़े पैमाने पर आबादी के प्रभावित होने को देखते हुए राज्य को अतिरिक्त केंद्रीय सहायता की जरूरत है।
PM CARES Fund से मदद पर सवाल
तेजस्वी ने प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपात स्थिति राहत कोष यानी PM CARES Fund से बिहार को मिली सहायता का भी ब्योरा मांगा। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि बिहार में आपदा की स्थिति को देखते हुए इस फंड से कितनी राशि उपलब्ध कराई गई।
यह सवाल राजनीतिक मांग के तौर पर सामने आया है; फंड से बिहार को मिली किसी विशिष्ट राशि की पुष्टि के लिए आधिकारिक वित्तीय विवरण देखना जरूरी होगा।
बाढ़ के साथ सूखे का मुद्दा भी उठाया
तेजस्वी यादव ने बाढ़ प्रभावित इलाकों के साथ-साथ सूखे की समस्या का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल किया कि कृषि क्षेत्र में मौसम से प्रभावित किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए सरकार की राहत योजना क्या है।
उन्होंने सरकार से बाढ़ और सूखे, दोनों परिस्थितियों से प्रभावित लोगों के लिए अलग-अलग स्तर पर सहायता सुनिश्चित करने की मांग की।
नितिन नवीन के राहत योगदान का भी जिक्र
बिहार बाढ़ के बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद नितिन नवीन ने 18 सितंबर को अपनी तीन महीने की सांसदीय सैलरी, करीब 6.35 लाख रुपये, मुख्यमंत्री राहत कोष में देने की घोषणा की थी।
इसके अलावा बिहार भाजपा ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 51 लाख रुपये देने की जानकारी दी है। पार्टी के अनुसार बिहार के भाजपा सांसद, विधायक और विधान पार्षद भी एक महीने का वेतन राहत कार्यों के लिए देने की घोषणा कर चुके हैं।
वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी एक महीने का वेतन राहत कोष में देने की घोषणा की है।
सरकार के राहत दावों और विपक्ष के सवालों के बीच सियासत
बाढ़ को लेकर एक तरफ विपक्ष सरकार से राहत व्यवस्था, फंड और केंद्रीय सहायता का हिसाब मांग रहा है, वहीं सरकार और भाजपा की ओर से प्रभावित परिवारों तक आर्थिक मदद, राहत शिविर, सामुदायिक रसोई और बचाव अभियान चलाए जाने की बात कही गई है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा है कि राज्य में प्रभावित परिवारों को वित्तीय सहायता दी जा रही है और फसल नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।
ऐसे में बिहार की बाढ़ और सूखे की स्थिति अब राहत एवं पुनर्वास के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी प्रमुख मुद्दा बन गई है।
