बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की हालत बहुत खराब है और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है तथा स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा विशेषज्ञ उनके इलाज की निगरानी कर रहे हैं. यह जानकारी उनकी पार्टी के नेताओं ने सोमवार को दी.
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की अध्यक्ष जिया को 23 नवंबर को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उन्हें सीने में संक्रमण की शिकायत थी, जिससे उनके हृदय और फेफड़े प्रभावित हुए.
चार दिन बाद, स्वास्थ्य जटिलताएं बढ़ने पर उन्हें कोरोनरी केयर यूनिट (सीसीयू) में स्थानांतरित किया गया था. समाचार पोर्टल टीबीएसन्यूजडॉटनेट ने बीएनपी उपाध्यक्ष एडवोकेट अहमद आजम खान के हवाले से बताया कि जिया की हालत बिगड़ गई है और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है.
उन्होंने यहां एवरकेयर अस्पताल के बाहर संवाददाताओं से कहा, ‘‘उनकी (खालिदा जिया) हालत बहुत खराब है. पूरे देश से प्रार्थना करने का अनुरोध करने के अलावा और कुछ नहीं किया जा सकता.’’
बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने भी पुष्टि की कि जिया की हालत गंभीर बनी हुई है और ढाका के अस्पताल में उनका इलाज जारी है, जहां स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा विशेषज्ञ उनकी देखभाल में लगे हुए हैं.
समाचार वेबसाइट ने उनके हवाले से कहा, ‘‘वह काफी बीमार हैं. पूरा देश उनके स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहा है…वह गंभीर रूप से बीमार हैं और हमारे डॉक्टर हर संभव प्रयास कर रहे हैं. स्थानीय और विदेशी विशेषज्ञ उनके इलाज में लगे हुए हैं. वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं.’’
बीएनपी के वरिष्ठ संयुक्त महासचिव रुहुल कबीर रिजवी ने रविवार को कहा कि जिया (80) की स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है.
बांग्लादेश के दिवंगत राष्ट्रपति जियाउर रहमान की पत्नी खालिदा जिया लंबे समय से कई गंभीर बीमारियों से जूझ रही हैं, जिनमें जिगर और गुर्दे संबंधी समस्याएं, मधुमेह, गठिया और आंखों की बीमारियां शामिल हैं. इस वर्ष वह एडवांस चिकित्सा इलाज के लिए चार महीने लंदन में रहने के बाद छह मई को ढाका लौटी थीं.
उनके इकलौते बेटे एवं बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान 2008 से लंदन में रह रहे हैं. उनके दूसरे बेटे अराफात रहमान का 2025 में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था.
पांच अगस्त, 2024 को छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने के बाद, बीएनपी बांग्लादेश के बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में अग्रणी दल के रूप में फिर से उभरी है.


