कटिहार जिले के गौरीपुर घासिया गांव में एक डेड बॉडी तीन दिनों से पड़ा था. पैसे के अभाव में शव का दाह संस्कार नहीं हो रहा था. हालांकि कुछ लोगों की मदद से शव को दफना दिया गया.
कटिहार जिले के अमदाबाद प्रखंड के बैरिया स्थित गौरीपुर घासिया में एक शव तीन दिनों से घर में इसलिए पड़ा रहा, क्योंकि उसके पास दाह संस्कार करने के लिए पैसे नहीं थे. मृतक के आश्रितों की आर्थिक हालत बहुत ही खराब है. उसके पास दाह संस्कार के लिए रुपये नहीं थे. यह खबर की चर्चा धीरे धीरे पूरे इलाके में होने लगी. घटना की जानकारी मिलते ही जन सुराज पार्टी के राज्य कोर कमेटी सदस्य निशिकांत मंडल, विधानसभा प्रभारी प्रदुमन ओझा, इंजीनियर सुभाष कुमार मंडल, कुंदन कुमार उनके परिवार से मुलाकात की.
मुआवजा देने की मांग
जन सुराज पार्टी की ओर से सरकार की ओर से 10 लाख मुआवजा देने की मांग की गयी है. जानकारी के अनुसार, गौरीपुर घासिया निवासी रिंटू मंडल पिता सीताराम मंडल को गांव के ठेकेदार फेकन मंडल के कहने पर गुजरात चावल मिल में काम करने के लिए ले गया था. जहां युवक की तबीयत खराब हो गयी. ठेकेदार ने इलाज कराने की जगह उसे अकेले ट्रेन में चढ़ा दिया था, जिससे युवक की मौत ट्रेन में ही हो गयी थी. 23 जुलाई को ही परिजन शव लेकर घर पहुंचे, लेकि घर की आर्थिक हालत इतनी खराब थी कि युवक की डेड बॉडी तीन दिन से घर पर पड़ा रहा. उसके पास दाह संस्कार के लिए रुपये नहीं थे.
ठेकेदार ने नहीं किया मदद
ठेकेदार एवं राइस मिल के मालिक ने किसी भी तरह की सहायता नहीं दी और ना ही प्रशासन किसी भी तरह से मदद किया. परिजनों का कहना है कि पुलिस प्रशासन को आवेदन देने पर ठेकेदार के ऊपर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की गयी. न ही प्रशासन के द्वारा किसी भी तरह का अंत्येष्टि के लिए गरीब असहाय परिवार को मदद की. परिवार का आर्थिक स्थिति दयनीय होने के कारण शव का हिंदू रीति रिवाज के अनुसार दाह संस्कार भी नहीं कर पाये. अंत में शव को मिट्टी में परिजन दफनाने को मजबूर हो गये


