पलामूः नक्सल इलाके में बने पुलिस पिकेट की उपयोगिता की समीक्षा हो रही है. कभी झारखंड देश के सबसे अधिक नक्सल प्रभावित राज्यों में शामिल था. झारखंड के कुछ ही इलाकों में नक्सल गतिविधि सिमट कर रह गई है.
झारखंड के पलामू रेंज में नक्सल विरोधी अभियान के लिए 2007-08 से पुलिस पिकेट और कैंप बनाने का कार्य शुरू हुआ था. 2022-23 पलामू, गढ़वा एवं लातेहार के इलाके में पुलिस, सुरक्षाबलों के कैंप एवं पिकेट का निर्माण हुआ.
अप्रैल 2024 में पलामू को केंद्र सरकार ने नक्सल मुक्त घोषित कर दिया. जिसके बाद से पलामू में तैनात सीआरपीएफ 134 बटालियन को क्लोज कर लिया गया. नक्सलियों के कमजोर होने के बाद पलामू रेंज में विभिन्न पिकेट एवं कैंप की उपयोगिता की समीक्षा हुई थी.
इस समीक्षा के बाद पलामू के इलाके में चार पुलिस विकेट को खत्म कर दिया गया. वहीं गढ़वा, लातेहार के इलाके में कई पिकेट को शैडो में रखा गया. एक बार फिर से पलामू, गढ़वा और लातेहार में बने पुलिस कैंप एवं पिकेट की समीक्षा शुरू हुई है.
बूढापहाड़ से बिहार, छत्तीसगढ़ सीमा तक 70 से अधिक कैंप और पिकेट
नक्सलियों के खिलाफ अभियान के लिए बूढ़ापहाड़ से लेकर छत्तीसगढ़, बिहार सीमा तक पलामू रेंज में 70 से अधिक पुलिस कैंप और पिकेट बनाए गए हैं. सबसे अधिक माओवादियों के बिहार के छकरबंधा, झारखंड के बूढ़ापहाड़ और सारंडा कॉरिडोर में बनाया गया है.
पुलिस कैंप एवं पिकेट की बदौलत नक्सलियों के तीन राज्यों के कॉरिडोर को बंद किया गया और नक्सलियों की सप्लाई लाइन को खत्म कर दिया गया. 2022 में बूढापहाड़ के इलाके में माओवादियों के खिलाफ अभियान ऑक्टोपस शुरू किया गया था, इस दौरान आधा दर्जन पिकेट और कैंप का निर्माण हुआ था.
पुलिस पिकेट की उपयोगिता की समीक्षा की जा रही है. नक्सलियों मूवमेंट और उनकी गतिविधि वाले इलाकों को टारगेट किया गया है. नए इलाकों को भी चिन्हित किया जा रहा है और निगरानी रखी जा रही है. पुलिस खास तौर पर नारकोटिक्स के रूट को भी देख रही है ताकि उनके नेटवर्क को खत्म किया जा सके. -किशोर कौशल, डीआईजी, पलामू.
नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में पिकेट और कैंप की महत्वपूर्ण भूमिका
नक्सलियों के खिलाफ अभियान में पुलिस पिकेट और कैंप ने महत्वपूर्ण भूमिका रही. साल 2006-07 में सबसे पहले नक्सल प्रभावित इलाके और उनके रूट में पिकेट और कैंप का निर्माण कार्य शुरू हुआ था. 2016 के बाद से पलामू, गढ़वा एवं लातेहार के इलाकों में योजनाबद्ध तरीके से पिकेट का निर्माण कार्य शुरू हुआ.
पुलिस पिकेट और कैंप के माध्यम से नक्सल अभियान चलाया जाता रहा है और नेतृत्व करता रहा है. पिकेट और कैंप के माध्यम से नक्सलियों की सप्लाई लाइन को काटा गया और कॉरिडोर को बंद किया गया. 2018 से 2022 तक बिहार, छत्तीसगढ़ सीमा और बूढापहाड़ को टारगेट कर कैंप बनाये गये. पिकेट के माध्यम से पलामू रेंज में किसी भी इलाके में नक्सल विरोधी अभियान आधे घंटे में शुरू हो जाती है.
नार्कोटिक्स वाले रुट पर पिकेट और कैंप की बढ़ाई जा सकती है संख्या
नक्सलियों के कमजोर होने के बाद पलामू, गढ़वा एवं लातेहार के इलाके में अफीम तस्करों का एक नया नेटवर्क डेवलप हुआ है. पिकेट की उपयोगिता के समीक्षा के दौरान इस रूट को ध्यान में रखा जाएगा. इस रूट पर पुलिस पिकेट और कैंप की संख्या को बढ़ाया जा सकता है. पुलिस ने नार्कोटिक्स के रूप के लिए खास योजना तैयार की है. अफीम के तस्कर एवं शराब के तस्कर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी है.


