Thursday, March 26, 2026

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता और गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के बीच गठजोड़ का आरोप लगाया है.

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रांची: अनुराग गुप्ता भले ही डीजीपी पद से हट गए हों, लेकिन उन पर लगे आरोप थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. अनुराग गुप्ता पर आक्रामक रुख अपनाए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक बार फिर उन्हें सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है. भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए.

‘गिव एंड टेक फार्मूले के तहत हुई थी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति’

बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार के दौरान उजागर हुए गैंगस्टरों, अपराधियों और पुलिस प्रशासन के गठजोड़ को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि अवैध डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति गिव एंड टेक फार्मूले के आधार पर की गई थी. हेमंत सोरेन को अपने अवैध बालू, कोयला, पत्थर और शराब के काले धन के साम्राज्य को चलाने के लिए अनुराग गुप्ता जैसे दनाम, टेस्टेड और वर्दीवाला गुंडा अपराधी चाहिए था. बिहार के गया में भी अनुराग गुप्ता की एसपी के रूप में ख्याति रही थी, मगध यूनिवर्सिंटी में इनका डिग्री घोटाला भी कम नहीं है. उन्होंने कहा कि अनुराग गुप्ता का अवैध तरीके से डीजीपी बनने का रिश्ता काला धंधा और राजनीतिक संरक्षण के समीकरण पर टीका था.

बाबूलाल मरांडी ने अनुराग गुप्ता पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पूरा मामला भारत माला प्रोजक्ट के वर्चस्व पर लड़ाई और सुजीत सिन्हा की कोयलाांचल शांति समिति से जुड़ा है. यह पूरा खेल पेटी टेंडर, स्टोन चिप्स, जमीन दलाली और अन्य अवैध कारोबारों के जरिए एक बड़ा नेटवर्क खड़ा करने की योजना से जुड़ा है.

‘सुजीत सिन्हा और अनुराग गुप्ता में गठजोड़’

उन्होंने कहा कि अनुराग गुप्ता ने इस प्रोजेक्ट पर नियंत्रण पाने के लिए सुजीत सिन्हा को चुना था, जिसमें अनुराग गुप्ता की 40% हिस्सेदारी थी. उन्होंने कहा कि अमन साहू का फर्जी एनकाउंटर इसी वर्चस्व की लड़ाई का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि जानकारी मिली है कि सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा की गिरफ्तारी के बाद बड़े रहस्य उजागर हुए हैं. अनुराग गुप्ता और रिया सिन्हा के बीच व्हाट्सएप चैट में अमन साहू के एनकाउंटर के लिए पैसों के लेन-देन और रंगदारी वसूली का पूरा हिसाब किताब दर्ज है.

‘हिस्सा नहीं मिलने के कारण अनुराग गुप्ता को हटाने की पहल हुई शुरू’

उन्होंने कहा कि यह जानकारी मिलने के बाद भी मुख्यमंत्री ने अवैध डीजीपी अनुराग गुप्ता को हटाने के लिए कोई पहल नहीं की. इसके बजाय, अवैध कमाई में मुख्यमंत्री का हिस्सा नहीं पहुंचने के कारण हेमंत सोरेन की किचन कैबिनेट में झगड़ा हो गया, जिसके बाद अवैध डीजीपी को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई. सुजीत सिन्हा और प्रिंस खान ने एक खतरनाक गठजोड़ बना लिया था, जिसे रिया सिन्हा संभाल रही थी. राजधानी रांची में हाल ही में हुई रंगदारी की कॉल इसी गठजोड़ का नतीजा थीं.

‘गुमनाम पिटीशन के जरिए लोगों को लूटा गया’

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अनुराग गुप्ता दो विभागों के डीजी थे: सीआईडी ​​और एसीबी. सीआईडी ​​में जमीन घोटालों की जांच के लिए एक एसआईटी बनाई गई थी, जिसमें याचिकाएं मंगाई जाती थी और अनुराग गुप्ता इन फाइलों को स्वतः संज्ञान लेकर खोलते थे. एसएसपी दीपक कुमार इस लूट में दाहिने हाथ की भूमिका में थे. डीएसपी अमर पांडे ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने कहा कि जांच के नाम पर गुमनाम पिटीशन के जरिए लोगों को खूब लूटा गया. उन्होंने कहा कि वे इन सभी मामलों की जांच के लिए एनआईए को पत्र लिखेंगे और गहन जांच की मांग करेंगे. उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री में हिम्मत है तो वे अनुराग गुप्ता के कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच करवाएं.

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