नई दिल्ली: नया वित्तीय वर्ष शुरू होने वाला है और ऐसे में बहुत से लोग अपनी बचत को सुरक्षित रखने और भविष्य के लिए निवेश की योजना बना रहे हैं. अक्सर लोग अधिक रिटर्न के लालच में सीधे शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना शुरू कर देते हैं, लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश की शुरुआत करने से पहले एक मजबूत ‘वित्तीय सुरक्षा घेरा’ यानी इमरजेंसी फंड बनाना अनिवार्य है.
क्या है इमरजेंसी फंड?
इमरजेंसी फंड वह आरक्षित राशि है जिसे केवल अचानक आने वाली वित्तीय चुनौतियों से निपटने के लिए अलग रखा जाता है. इसमें नौकरी छूटना, अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी, घर की बड़ी मरम्मत या कोई अन्य अप्रत्याशित खर्च शामिल हो सकता है. यह फंड आपकी लंबी अवधि के निवेश को सुरक्षा प्रदान करता है ताकि जरूरत पड़ने पर आपको अपने निवेश को नुकसान में न बेचना पड़े.
कितना बड़ा होना चाहिए यह फंड?
वित्तीय विशेषज्ञों और मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक आदर्श इमरजेंसी फंड आपके कम से कम तीन से छह महीने के अनिवार्य खर्चों के बराबर होना चाहिए.
अनिवार्य बनाम गैर-जरूरी खर्च
फंड की गणना करते समय केवल उन खर्चों को जोड़ें जिनके बिना गुजारा संभव नहीं है.
अनिवार्य (शामिल करें): घर का किराया या होम लोन की ईएमआई (EMI), राशन, बिजली-पानी का बिल, इंश्योरेंस प्रीमियम, बच्चों की स्कूल फीस और लोन का भुगतान.
गैर-जरूरी (न जोड़ें): बाहर खाना, घूमना-फिरना, शॉपिंग और ओटीटी (OTT) सब्सक्रिप्शन.
उदाहरण के लिए, यदि आपका मासिक अनिवार्य खर्च 40,000 रुपये है, तो आपका इमरजेंसी फंड 1.2 लाख से 2.4 लाख रुपये के बीच होना चाहिए.
आय की स्थिरता और जिम्मेदारी का प्रभाव
इमरजेंसी फंड का आकार आपकी व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर करता है
आय की स्थिरता: यदि आप प्राइवेट सेक्टर, स्टार्टअप या फ्रीलांसिंग में हैं जहाँ आय घट-बढ़ सकती है, तो आपको 6 से 9 महीने का फंड रखना चाहिए. सरकारी नौकरी या स्थिर आय वाले लोग 3 महीने के फंड से शुरुआत कर सकते हैं.
आश्रित सदस्य: यदि घर में आप अकेले कमाने वाले हैं या आपके साथ बुजुर्ग माता-पिता और बच्चे हैं, तो फंड का आकार बड़ा होना चाहिए.
पैसे कहाँ रखें? सुरक्षा और तरलता सबसे जरूरी
इमरजेंसी फंड का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि जरूरत के समय पैसे का उपलब्ध होना है. विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस पैसे को ऐसी जगह रखें जहाँ से इसे 24 से 48 घंटों के भीतर निकाला जा सके:
- बचत खाता: फंड का एक छोटा हिस्सा तत्काल नकद जरूरतों के लिए यहाँ रखें.
- लिक्विड म्यूचुअल फंड: यहां जोखिम कम होता है और पैसा जल्दी निकाला जा सकता है.
- शॉर्ट टर्म डिपॉजिट: बैंक की छोटी अवधि की एफडी सुरक्षा और आसान निकासी का अच्छा विकल्प है.
- सावधानी: इस फंड को कभी भी शेयर बाजार (Equities), रियल एस्टेट या लॉक-इन पीरियड वाली योजनाओं में न लगाएं, क्योंकि बाजार में गिरावट होने पर आपकी मूल राशि कम हो सकती है.
कैसे शुरू करें?
युवा पेशेवरों के लिए एक बार में बड़ी राशि जमा करना मुश्किल हो सकता है. इसके लिए आप अपनी मासिक आय का एक निश्चित हिस्सा (जैसे 10-15%) अलग करना शुरू करें. एक बार जब आपका सुरक्षा कवच (6 महीने का फंड) तैयार हो जाए, तब आप बेझिझक इक्विटी, रिटायरमेंट प्लान या अन्य लंबी अवधि के निवेश की ओर बढ़ सकते हैं.
वित्तीय नियोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रिटर्न कमाना नहीं, बल्कि अपनी पूंजी को सुरक्षित रखना है. जैसा कि विशेषज्ञों का कहना है, “पहले सुरक्षा, फिर निवेश.” इमरजेंसी फंड आपके और आपके परिवार के लिए वह ढाल है जो आर्थिक संकट के समय आपको कर्ज के जाल में फंसने से बचाती है.


