Saturday, June 27, 2026

नासा के पर्सिवियरेंस रोवर ने जेज़ेरो क्रेटर की ब्राइट एंजल चट्टानों में जटिल कार्बन पार्टिकल खोजे हैं.

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अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा के पर्सिवियरेंस रोवर ने मंगल ग्रह की सतह पर एक बड़ी खोज की है. वैज्ञानिकों को अरबों साल पुरानी चट्टानों में बड़े दर्लुभ मुश्किल जटिल कार्बन-बेस्ड पार्टिकल मिले हैं, जो मंगल पर कभी जीवन रहने की संभावना को और मजबूत रहते हैं.

यह खोज जेज़ेरो क्रेटर के भीतर मौजूद नेरेत्वा वैलिस नाम की एक सूखी नदी घाटी में हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, किसी समय में इस घाटी से होकर पानी भी बहता था, जो जेज़ेरो क्रेटर में जाकर जमा होता था. यही वजह है कि वैज्ञानिक इस इलाके को मंगल पर प्राचीन जीवन की खोज के लिए सबसे संभावित जगहों में से एक मानते हैं.

  • यह खोज पर्सिवियरेंस रोवर की रोबोटिक आर्म पर लगे शर्लक (SHERLOC) नाम के डिवाइस की मदद से की गई है. यह डिवाइस खासतौर से कार्बनिक यानी ऑर्गेनिक यौगिकों का पता लगाने के लिए बनाया गया है.
  • 24 जून 2026 को साइंस एडवांसेज जर्नल में इस नई स्टडी को पब्लिश किया गया है कि वैज्ञानिकों ने ब्राइट एंजल नाम की चट्टानी संरचना में दो मडस्टोन यानी मिट्टी-पत्थरों के भीतर सैकड़ों जगहों पर ऑर्गेनिक कार्बन का पता लगाया है.
  • इस स्टडी की को-ऑथर एश्ली मर्फी के मुताबिक, यह जेज़ेरो क्रेटर में मिला अब तक का सबसे ठोस ऑर्गेनिक डिटेक्शन है. वैज्ञानिकों ने इसे मैक्रोमॉलिक्यूलर कार्बन यानी एमएमसी नाम दिया है और उनका कहना है कि यह मंगल की किसी प्राकृतिक चट्टान की सतह पर मिला अपनी तरह का पहला डिटेक्शन है.

यह खोज इतनी अहम क्यों है?

कार्बन को धरती पर जीवन की सबसे बुनियादी इकाई यानी सबसे जरूरी चीजों में से एक माना जाता है, लेकिन सिर्फ कार्बिनिक पार्टिकल मिलने से यह साबित नहीं होता कि वहां जीवन रहा होगा, क्योंकि यह भूगर्भीय प्रक्रियाओं या उल्कापिंड के टकराने से भी बन सकते हैं.

इस खोज को खास बनाने वाली बात यह है कि इन्हीं चट्टानों में आयरन-फॉस्फेट और सल्फाइड जैसे खनिज भी मौजूद हैं, जो पानी से जुड़ी केमिकल रिएक्शन्स से बनते हैं. इसी स्ट्रक्चर के अंदर चेयावा फॉल्स नाम की एक जगह को नासा पहले ही संभावित बायोसिग्नेचर बता चुका है. रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक रोवर के डिवाइस यह तय नहीं कर सकते हैं कि यह कार्बन यौगिक किसी जीवित जीव से बने हैं या सिर्फ भूगर्भीय केमिकल रिएक्शन्स से बने हैं.

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस रहस्य को सुलझाने का सबसे भरोसेमंद तरीका मंगल की चट्टानों के नमूने धरती पर वापस लाना है, जहां अत्याधुनिक एक्सपेरीमेंट्स में इनकी गहराई में जांच हो सके. हालांकि, अमेरिका के मार्स सैंपल रिटर्न मिशन के भविष्य पर फंडिंग को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

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