चाहे लोग इस बात को माने या न माने, कुछ आदतें सचमुच बहुत बुरी होती हैं. कुछ लोग इन आदतों के इतने आदी हो जाते हैं कि उन्हें ये ‘सामान्य’ लगने लगती हैं. जिनमें नाखून चबाना, नहाते समय पेशाब करना, और टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद हाथ न धोना शामिल हैं. ये सभी आदते बेहद गंदी मानी जाती है. इनमें से एक और बुरी आदत बार-बार नाक में उंगली डालना है. विस्कॉन्सिन में 1995 में की गई एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 1,000 वयस्कों (adults) में से 91 फीसदी ने स्वीकार किया कि वे यह काम करते हैं. नाक में उंगली डालना आम तौर पर एक घिनौनी आदत मानी जाती है, लेकिन इस स्टडी यह भी पता चला है कि ऐसा करके हम असल में खुद को एक लाइलाज बीमारी की चपेट में आने के जोखिम में डाल रहे हैं.
नाक में उंगली डालने की आदत से सेहत को गंभीर खतरे हो सकते हैं, क्योंकि इससे बैक्टीरिया और वायरस सीधे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे इन्फेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, यह आदत नाक की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा सकती है और बैक्टीरिया को दिमाग तक पहुंचने में मदद कर सकती है, जिससे अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा, नाक में उंगली डालने से क्लैमाइडिया न्यूमोनिया का इन्फेक्शन भी हो सकता है.
क्लैमाइडिया न्यूमोनिया को एक प्रकार का बैक्टीरिया माना जाता है, जो श्वसन तंत्र में संक्रमण पैदा करने में सक्षम होता है. आमतौर पर, ये संक्रमण हल्के होते हैं, हालांकि, कुछ मामलों में ये गंभीर रूप भी ले सकते हैं, जिनके इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स की आवश्यकता होती है.
विशेषज्ञ नाक में उंगली डालने से मना करते हैं, क्योंकि…
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, क्लैमाइडिया न्यूमोनिया आपके श्वसन तंत्र की अंदरूनी परत पर हमला करते हैं, जिसमें गला, श्वास नली और फेफड़े शामिल हैं. ऊपरी रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को प्रभावित करने वाले मामलों में, क्लैमाइडिया न्यूमोनिया कान के इंफेक्शन, साइनस इंफेक्शन और गले में खराश जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है, इसके विपरीत, निचले श्वसन मार्ग (Respiratory tract) से जुड़े मामलों में, यह ब्रोंकाइटिस, लैरींगाइटिस और गंभीर निमोनिया जैसी स्थितियों का कारण बन सकता है.
ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने चूहों पर किए गए एक अध्ययन में पाया कि Chlamydia pneumoniae नामक बैक्टीरिया नाक के रास्ते से सीधे दिमाग में प्रवेश कर सकता है. यह बैक्टीरिया दिमाग में एमाइलॉइड-बीटा प्रोटीन (प्लाक) के जमाव को बढ़ावा देता है, जो अल्जाइमर रोग का एक प्रमुख लक्षण है.
इसके साथ ही कुछ शोध में पाया गया है कि क्लैमाइडिया न्यूमोनिया बैक्टीरिया मस्तिष्क में संक्रमण और संभावित रूप से अल्जाइमर जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव डिसऑर्डर का कारण बन सकते हैं. वैसे तो, हर उम्र के लोगों को क्लैमाइडिया न्यूमोनिया होने का खतरा रहता है, हालांकि 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को इसका खतरा अधिक होता है. इसका प्रकोप अक्सर भीड़-भाड़ वाली जगहों पर होता है, जैसे कॉलेज के हॉस्टल, जेल, मिलिट्री सेंटर, अस्पताल और रिटायरमेंट होम.
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, क्लैमाइडिया न्यूमोनिया बैक्टीरिया आमतौर पर हल्के इन्फेक्शन पैदा करता है, हालांकि, गंभीर मामलों में, यह निमोनिया (फेफड़ों की एक गंभीर सूजन) का कारण बन सकता है. यह कुछ दुर्लभ लेकिन गंभीर जटिलताएं भी पैदा कर सकता है, जैसे अस्थमा का बिगड़ना, मस्तिष्क की सूजन (एन्सेफलाइटिस), और हृदय की सूजन (मायोकार्डिटिस). इसके अलावा, कुछ पुराने इन्फेक्शन को गठिया और एथेरोस्क्लेरोसिस (रक्त वाहिकाओं के अंदर प्लाक का जमाव) जैसी स्थितियों में योगदान देने वाला माना जाता है.


